पटना | 05 मार्च 2026बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी जिलों में एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध होगी।
यह एंबुलेंस किसी चलते-फिरते आईसीयू (ICU) से कम नहीं है, जो दिल का दौरा, सांस की तकलीफ या गंभीर सड़क हादसों के शिकार मरीजों को ‘गोल्डन ऑवर’ में जीवनदान देगी।
क्रिटिकल मरीजों के लिए ‘संजीवनी’ साबित होगी यह सेवा: स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि एनडीए सरकार आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि अब तक केवल बड़े मेडिकल कॉलेजों तक ही उच्च स्तरीय सुविधाएं सीमित थीं, जिससे ग्रामीण इलाकों के मरीजों को रेफर होने पर जान का जोखिम रहता था। अब जिला और प्रखंड स्तर पर ALS एंबुलेंस तैनात होने से गंभीर मरीजों को उच्चतर अस्पतालों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा।
एंबुलेंस में मिलेंगी ये अत्याधुनिक सुविधाएं: यह विशेष एंबुलेंस केवल वाहन नहीं, बल्कि एक मिनी अस्पताल की तरह काम करेगी। इसमें शामिल हैं:वेंटिलेटर और कार्डियक मॉनिटर: श्वसन और हृदय गति पर नजर रखने के लिए।डिफिब्रिलेटर: दिल की धड़कन रुकने या अनियमित होने पर शॉक देने वाली मशीन।
जीवन रक्षक दवाएं: आपातकालीन स्थिति में तुरंत दी जाने वाली सभी आवश्यक दवाएं।विशेषज्ञ टीम: इन उपकरणों के संचालन के लिए एंबुलेंस में प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और डॉक्टर मौजूद रहेंगे।
102 टोल-फ्री सेवा का विस्तार: अब बेड़े में होंगी 2065 एंबुलेंसस्वास्थ्य मंत्री ने आंकड़ों के जरिए विभाग की प्रगति साझा की:बढ़ती संख्या: वर्तमान में राज्य में 1941 एंबुलेंस कार्यरत हैं। जल्द ही 124 नई एंबुलेंस जोड़ी जाएंगी, जिससे कुल संख्या 2065 हो जाएगी।
निशुल्क सेवा: किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना के समय मरीज टोल-फ्री नंबर 102 डायल कर इस मुफ्त सेवा का लाभ उठा सकते हैं।
लाभार्थियों का आंकड़ा: वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 14.30 लाख लोगों ने इसका लाभ लिया, वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी तक ही यह आंकड़ा 15.94 लाख को पार कर गया है।इस नई व्यवस्था से बिहार के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब इलाज के अभाव में बड़े शहरों की ओर दौड़ते समय अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ेगी।
