Saturday, April 25, 2026
Homeपटना में 'हीटवेव' से निपटने की तैयारी: जिलाधिकारी ने जारी किया 'एक्शन...

पटना में ‘हीटवेव’ से निपटने की तैयारी: जिलाधिकारी ने जारी किया ‘एक्शन प्लान’, लापरवाही बरतने पर अधिकारियों को सख्त निर्देश

पटना में ‘हीटवेव’ से निपटने की तैयारी: जिलाधिकारी ने जारी किया ‘एक्शन प्लान’, लापरवाही बरतने पर अधिकारियों को सख्त निर्देश

पटना। बिहार की राजधानी में बढ़ते तापमान और संभावित लू (Heatwave) के खतरों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार को समाहरणालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी (DM), पटना ने सभी विभागों को आपदा प्रबंधन विभाग के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार चाक-चौबंद व्यवस्था रखने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

​पेयजल संकट से निपटने के लिए पीएचईडी (PHED) और नगर निकायों को युद्ध स्तर पर काम करने को कहा गया है:

चापाकल मरम्मत: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खराब चापाकलों को ठीक करने के लिए 46 चलंत मरम्मति दल तैनात किए गए हैं।

सार्वजनिक प्याऊ: पटना के 17 नगर निकायों में 370 स्थानों पर प्याऊ और 15 आश्रय स्थलों का संचालन शुरू कर दिया गया है।

टैंकर की व्यवस्था: जलस्तर गिरने वाले क्षेत्रों में टैंकरों से पानी पहुँचाने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए दो नियंत्रण कक्ष (पटना पूर्व: 0612-2225796 और पटना पश्चिम: 0612-2280879) भी बनाए गए हैं।


​स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में फिलहाल 30 हीटवेव वार्ड और 88 आरक्षित बेड तैयार हैं।

​हर पीएचसी, सीएचसी और अनुमंडल अस्पताल में 3-3 बेड तथा जिला अस्पताल में 4 बेड सुरक्षित रखे गए हैं।

​अस्पतालों में ओआरएस (ORS), आईवी फ्लूइड और जीवन रक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

प्रार्थना सभा में जागरूकता: स्कूलों में प्रार्थना के समय बच्चों को लू से बचाव की जानकारी दी जाएगी।

मनरेगा व निर्माण कार्य: श्रम संसाधन विभाग को निर्देश दिया गया है कि कार्यस्थलों पर छाया और पेयजल की व्यवस्था हो। लू की स्थिति में श्रमिकों की कार्य अवधि (Work Hours) में भी बदलाव किया जाएगा।

परिवहन: बसों और सार्वजनिक वाहनों में पेयजल एवं प्राथमिक उपचार किट रखना अनिवार्य होगा।


​पशुपालन और वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे तालाबों, आहरों और चिड़ियाघरों में पानी की व्यवस्था करें। पशुओं के लिए छायादार स्थान और गड्ढे खुदवाकर पानी इकट्ठा करने को कहा गया है ताकि वन्य जीवों को प्यास से राहत मिल सके।

प्रमुख लक्षण: अधिक पसीना आना, तेज सांस, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, मतली या चक्कर आना।

बचाव के उपाय:

छाया का सहारा: पीड़ित व्यक्ति को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और गीले कपड़े से शरीर को ठंडा करें।

तरल पदार्थ: यदि व्यक्ति होश में है, तो उसे पानी या ओआरएस (ORS) दें। शराब या कैफीन युक्त पेय न दें।

समय का ध्यान: दोपहर के समय बाहरी गतिविधियों से बचें और हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें।

आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर (24×7):

जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र: 0612-2210118

जिला नियंत्रण कक्ष: 0612-2219810 / 2219234

आपदा प्रबंधन टॉल-फ्री: 1070

स्वास्थ्य हेल्पलाइन: 104

अग्निशमन: 112 / 101

यह भी पढ़े

अन्य खबरे