Monday, September 21, 2026
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पटना : ज्ञान भवन में बिहार सरस मेला का जलवा, पहले दिन 24 हजार लोग पहुंचे, 20 लाख से अधिक की बिक्री

पटना : ज्ञान भवन में बिहार सरस मेला का जलवा, पहले दिन 24 हजार लोग पहुंचे, 20 लाख से अधिक की बिक्री

पटना: पटना के ज्ञान भवन में बिहार सरस मेला का जलवा, पहले दिन 24 हजार लोग पहुंचे, 20 लाख से अधिक की बिक्री पटना : ज्ञान भवन में बिहार सरस मेला का जलवा, पहले दिन 24 हजार लोग पहुंचे, 20 लाख से अधिक की बिक्री में ग्रामीण शिल्पकारों और महिला उद्यमियों का महाकुंभ बिहार सरस मेला पूरी भव्यता के साथ चल रहा है। मेले में बिहार समेत 15 राज्यों की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी जीविका दीदियां अपने-अपने प्रदेश के हुनर, शिल्प और जायके से पटना वालों को रूबरू करा रही हैं।

मेले का शुभारंभ 20 सितंबर को ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने किया था। पहले दिन से ही मेले को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह दिख रहा है।

पहले दिन 20 लाख की बिक्री, शहर में गांव के उत्पादों की धूम

आयोजकों के मुताबिक पहले दिन 20 सितंबर को ही 24 हजार से ज्यादा लोगों ने मेले का भ्रमण किया। पहले ही दिन 20 लाख 28 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों की खरीद-बिक्री हुई, जो ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे साफ है कि शहरी लोग हाथ से बने, जैविक और पारंपरिक उत्पादों को काफी पसंद कर रहे हैं।

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बड़े बाजार से जुड़ेंगी जीविका दीदियां, हुआ क्रेता-विक्रेता संवाद

मेले के दूसरे दिन ज्ञान भवन सभागार में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और अर्न्स्ट एंड यंग के तत्वावधान में क्रेता-विक्रेता संवाद का आयोजन किया गया। इसका मकसद ग्रामीण उत्पादों को बड़े बाजार, ब्रांडिंग और स्थायी बिक्री से जोड़ना था।

संवाद में बिहार के गोविंदभोग चावल, सोनाचूर चावल, मिथिला के मखाना, मिलेट्स, केला चिप्स, हल्दी-मिर्च पाउडर जैसे उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर चर्चा हुई।

इसमें वसंत इम्पेक्स, डीटीपीसी, ड्यूलक्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपक्राफ्ट, विजया वेंचर्स और नोबेल संस्था जैसी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने क्रेता के रूप में भाग लिया और भविष्य में बड़े ऑर्डर को लेकर रुचि दिखाई।

इस मौके पर जीविका की कार्यक्रम समन्वयक महुआ रॉय चौधरी, राज्य परियोजना प्रबंधक डॉ. राकेश कुमार सिंह और जिला परियोजना प्रबंधक माधवी चौधरी ने दीदियों को पैकेजिंग, मूल्य निर्धारण और ऑनलाइन मार्केटिंग के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि बिहारिका ब्रांड के जरिए जीविका उत्पादों को अब राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

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मधुबनी से पैठणी तक, लिट्टी-चोखा से अचार तक सब कुछ

मेले में बिहार की मधुबनी पेंटिंग, सुजनी कला, सिक्की शिल्प, टेराकोटा, भागलपुरी सिल्क के साथ राजस्थान की लाख की चूड़ियां, गुजरात का बंधेज, महाराष्ट्र की पैठणी, गोवा और बंगाल का जूट शिल्प, असम का बांस शिल्प और दक्षिण भारतीय मसालों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हैं।

जीविका दीदियों के शिल्पग्राम महिला उत्पादक समूह के स्टॉल पर पूरे बिहार के परिधान और शिल्प एक ही जगह मिल रहे हैं, तो मधुग्राम स्टॉल पर शुद्ध शहद की बिक्री हो रही है। खादी, सिल्क, कॉटन की साड़ियां, फुलकारी, चिकनकारी सूट, कालीन, लैंप, झूमर के साथ बच्चों के लिए लट्टू, डमरू और लकड़ी के खिलौने भी खूब बिक रहे हैं।

फूड कोर्ट में दीदी की रसोई पर लिट्टी-चोखा, तो दूसरे स्टॉल पर अचार, पापड़, सत्तू, मखाना, कतरनी चावल और गुड़ का रवा लोग घर के लिए भी ले जा रहे हैं। मेले में आए लोगों का कहना है कि एक ही छत के नीचे पूरे भारत की संस्कृति देखने को मिल रही है और उत्पाद शुद्ध और किफायती हैं।

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