बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के आज सम्पन्न मतगणना में जनसूराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने एकतरफा जीत दर्ज की। कुल 31 राउंड की मतगणना में जनसूराज के प्रशांत किशोर ने भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा से हर राउंड में बढ़त बनाए रखी। और अंत में लगभग 19 हजार वोट से जीत दर्ज की।
शुरुआत से ही भाजपा नेतृत्व द्वारा अपने उम्मीदवार नीरज सिन्हा को जिताने के लिए किए जा रहे हर सीमाओं को लांघकर प्रयास पर “न्यूजलहर” द्वारा पहले ही अनुमान लगा लिया था कि यहां से प्रशांत किशोर की जीत निश्चित है।
चाहे वो बात यहां से देश भर में चर्चित चेहरा और अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार प्रशांत किशोर के विरोध में भाजपा नेतृत्व द्वारा अत्यंत साधारण उम्मीदवार उतरना हो। या फिर यहां प्रचार प्रसार में आने वाले नेताओं की फौज द्वारा महज दिखावटी प्रचार हो।
ये सब बात इस क्षेत्र के आम भाजपाइयों के साथ वरिष्ठ भाजपा नेता भी दबे जुबान से यह मान रहे थे कि इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा प्रतिद्वंदी उम्मीदवार प्रशांत किशोर के टक्कर का नहीं है।
मतलब बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के आम भाजपाई भी भाजपा नेतृत्व द्वारा यहां से दिए गए उम्मीदवार से संतुष्ट नहीं थे। ऊपर से वरिष्ठ भाजपा नेता और पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद का ये वक्तव्य “कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ है और भाजपा यहां से अगर कुते बिल्ली को भी उतारती है तो वो निश्चित जीतेगा।”
सांसद रविशंकर प्रसाद का यह वक्तव्य भाजपाइयों के साथ आम भाजपा समर्थित मतदाताओं को नाराज करने के लिए काफी था। और इसके दुष्परिणाम भाजपा के विरोध में मतदान से समझा जा सकता है।
यहां के मतदाताओं में सबसे बुरा प्रभाव भाजपा नेतृत्व द्वारा यहां प्रशांत किशोर के समर्थकों को निरंतर परेशान करने से हुआ। जनसुराज समर्थकों के हॉटल में दबिश, रोके रखना, और चुनाव मतदान के ठीक पहले की रात जनसुराज के 36 प्रमुख कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा उठा लेना यहां के मतदाताओं में क्या असर दिया होगा ये समझना आसान है।
प्रशांत किशोर की जीत निश्चित तौर पर बांकीपुर के उन समझदार मतदाताओं की जीत है जिन्होंने बिना जाति, धर्म, और प्रलोभन में आए गंभीरता और निर्भीकता से चुनाव मैदान में उतरे प्रशांत किशोर के पक्ष में एकमुश्त मतदान कर जीत दिलाई। लेकिन भाजपा जो अलमस्त हाथी की तरह मदमस्त चाल में चल रही थी। इस चुनावी हार ने उसपर ब्रेक जरूर लगाया है।
