Tuesday, July 21, 2026
Homeबिहारनीति आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा में आगे...

नीति आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा में आगे बढ़ा बिहार, लेकिन ‘बिजनेस माहौल’ में अब भी फिसड्डी

अंजनी कुमार

पटना। नीति आयोग द्वारा जारी ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026’ की रिपोर्ट ने बिहार के विकास की एक मिली-जुली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार ने बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर), बिजली-पानी की उपलब्धता और शिक्षा के बजट में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन जब बात निवेशकों को आकर्षित करने और बेहतर बिजनेस माहौल (बिजनेस क्लाइमेट) देने की आती है, तो राज्य अभी भी काफी पीछे है।

राष्ट्रीय स्तर पर 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सूची में बिहार 26वें स्थान पर है। वहीं, अगर देश के 17 बड़े राज्यों की तुलना की जाए, तो बिहार सबसे अंतिम (17वें) पायदान पर खिसक गया है। 100 अंकों के पैमाने पर बिहार का कुल स्कोर 41.2 रहा है, जिसके कारण इसे ‘इमर्जिंग परफॉर्मर’ (उभरते राज्य) की श्रेणी में रखा गया है।

चुनौती बड़ी: बड़े राज्यों के औसत से 72% कम है प्रति व्यक्ति GSDP

रिपोर्ट के सबसे चिंताजनक आंकड़ों में से एक राज्य की प्रति व्यक्ति आय से जुड़ा है। बिहार की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी (GSDP) मात्र ₹44,705 है, जो देश के बड़े राज्यों के औसत से 72% कम है।

अर्थव्यवस्था का ढांचा: बिहार की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र (Service Sector) की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 67.5% है, जबकि उद्योग क्षेत्र 22.1% और कृषि क्षेत्र 10.4% पर है।

विदेशी निवेश की कमी: वर्ष 2023-24 में बिहार को केवल 0.16 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मिला, जो राज्य की क्षमता के मुकाबले बेहद कम है।

बिहार के मजबूत पक्ष: जहाँ राज्य ने मारी बाजी

नीति आयोग के ‘वॉइसेज फ्रॉम द ग्राउंड’ सर्वे में 1,850 से अधिक निवेशकों ने माना है कि बिहार में कुछ क्षेत्रों में अभूतपूर्व सुधार हुआ है:

शिक्षा पर भारी खर्च: बिहार ने शिक्षा पर सरकारी खर्च को बड़े राज्यों के औसत से 46% अधिक रखा है।

बेहतर कनेक्टिविटी: देश के कुल भूभाग का केवल 2.9% होने के बावजूद, भारत के कुल राष्ट्रीय राजमार्गों का 4%, ग्रामीण सड़कों का 8% और रेल ट्रैक का 5.7% बिहार में है। बड़े राज्यों की तुलना में यहाँ रेलवे घनत्व काफी बेहतर है।

बिजली, पानी और पर्यावरण: निवेशकों के अनुसार, बिजली और पानी की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही, उद्योगों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) की प्रक्रिया पहले से काफी सरल हुई है।

कोल्ड स्टोरेज क्षमता: बिहार की कोल्ड स्टोरेज क्षमता बड़े राज्यों के औसत से 23% अधिक है, जो कृषि-आधारित उद्योगों के लिए एक बड़ा वरदान है।

कमजोर कड़ियाँ: जिसके कारण नहीं आ रहा निवेश

बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद, राज्य में निवेश न आने के पीछे कई प्रमुख ढांचागत और प्रशासनिक कमियां हैं:

कमजोर बिजनेस क्लाइमेट व कानून व्यवस्था: बड़े राज्यों में बिहार का बिजनेस माहौल सबसे कमजोर आंका गया है। साथ ही, कानून व्यवस्था को लेकर भी निवेशकों की धारणा अभी नकारात्मक है।

औद्योगिक पार्कों और भूमि का अभाव: राज्य में समर्पित औद्योगिक पार्कों की भारी कमी है, और नए उद्योग लगाने के लिए भूमि आवंटन (Land Allotment) की प्रक्रिया बेहद जटिल बनी हुई है।

खराब हवाई कनेक्टिविटी: पटना के अलावा टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई कनेक्टिविटी बेहद कमजोर है। इसके अलावा उद्योगों के लिए 24 \times 7 निर्बाध बिजली की कमी भी एक बड़ी बाधा है।

नवाचार (Innovation) और MSME में पिछड़ापन: बिहार में सक्रिय कंपनियों में पेटेंट आवेदनों का अनुपात केवल 0.48% है (जबकि बड़े राज्यों का औसत 3.6% है)। इसके अलावा, एमएसएमई (MSME) क्षेत्र में बिहार 32वें स्थान पर है। उद्योगों को मिलने वाला बैंक ऋण राज्य की जीएसडीपी का केवल 6.7% है, जो विस्तार के लिए नाकाफी है।

वित्तीय देनदारियां: राज्य की कुल बकाया देनदारियां राष्ट्रीय औसत से लगभग 500 बेसिस पॉइंट अधिक हैं, जो गंभीर वित्तीय सुधारों की आवश्यकता को दर्शाता है।

गुजरात सबसे आगे, बिहार के लिए सबक

इस इंडेक्स में बड़े राज्यों की श्रेणी में गुजरात पहले स्थान पर रहा है, जिसके बाद क्रमशः महाराष्ट्र और तमिलनाडु का नंबर आता है।

निष्कर्ष: नीति आयोग की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि बिहार के पास कृषि-आधारित उद्योगों (फूड प्रोसेसिंग आदि) और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुर संभावना है। लेकिन जब तक राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम नहीं बनाएगी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं करेगी और निवेशकों के भीतर सुरक्षा व भरोसे का माहौल पैदा नहीं करेगी, तब तक इंफ्रास्ट्रक्चर में किया गया निवेश पूरी तरह रोजगार और समृद्धि में तब्दील नहीं हो पाएगा।

यह भी पढ़े

अन्य खबरे