पटना:
बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर इन दिनों उच्च शिक्षा के भविष्य का सवाल खड़ा हो गया है। ‘ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले राज्य के शोधार्थी पिछले 6 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बीकु सिंह प्रधान के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन से जुड़े युवाओं का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, लेकिन बिहार सरकार के किसी भी जिम्मेदार प्रतिनिधि ने अब तक अनशनकारियों से संवाद करने की जहमत नहीं उठाई है।
सरकार की उदासीनता पर सवाल
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य अजय यादव ने इस स्थिति को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि शोधार्थी अपनी मांगों को लेकर लगातार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं। माननीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री तक अपनी बात पहुँचाने के बावजूद सरकार की यह उदासीनता चिंताजनक है। यदि लंबे समय से भूखे रहकर आंदोलन कर रहे इन युवाओं के स्वास्थ्य के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी नैतिक जिम्मेदारी बिहार सरकार की होगी।
प्रमुख मांगें:
अनशनकारी मुख्य रूप से उच्च शिक्षा में किए गए शोधार्थी-विरोधी बदलावों का विरोध कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है:
उच्च शिक्षा से जुड़े युवा-विरोधी प्रावधानों की तत्काल समीक्षा और सुधार।
पुरानी UGC नियमावली के प्रावधानों को पुन: लागू करना।
नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
पीएच.डी. एवं NET अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना।
पीएम मोदी और गृह मंत्री से लगाई गुहार
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अजय यादव ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार बिहार सरकार को निर्देशित करे कि वे अनशनकारियों से तत्काल संवाद स्थापित करें। साथ ही, अनशनकारियों के स्वास्थ्य के लिए उचित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने और उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भी आग्रह किया है।
बिहार के शिक्षित युवाओं और शोधार्थियों की यह लड़ाई केवल चंद लोगों की नहीं, बल्कि राज्य के शैक्षणिक भविष्य और शोध की गुणवत्ता की लड़ाई है। अब देखना यह है कि क्या केंद्र के हस्तक्षेप के बाद बिहार सरकार की नींद टूटती है या यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
