पंडित धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के त्रिभंग स्वरूप पर टिप्पणी का मामला, अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा ने की सार्वजनिक माफी की मांग
पटना: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य त्रिभंग स्वरूप और उनकी लीलाओं पर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणियों को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा, बिहार ने इस बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला करार दिया है। महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए धीरेंद्र शास्त्री से तत्काल सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग की है।
श्रीकृष्ण के स्वरूप पर टिप्पणी अस्वीकार्य: डॉ. गोरेलाल यादव अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. गोरेलाल यादव, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ओम प्रकाश, पूर्व विधायक व प्रदेश प्रधान महासचिव विनोद कुमार यादवेंदु, प्रदेश प्रधान महासचिव के.पी. यादव तथा प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता अजय यादव ने संयुक्त रूप से इस बयान की कड़ी भर्त्सना की है।
नेताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल एक समाज के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के पथप्रदर्शक, योगेश्वर और सनातन संस्कृति के सर्वोच्च आदर्श हैं। उनका ‘त्रिभंग स्वरूप’ सौंदर्य, माधुर्य, प्रेम और दिव्यता का प्रतीक है। उनकी अलौकिक लीलाओं का आध्यात्मिक अर्थ समझे बिना उपहास उड़ाना या अशोभनीय टिप्पणी करना कतई स्वीकार्य नहीं है।
धार्मिक मंचों पर गरिमा बनाए रखना जरूरी महासभा का कहना है कि धार्मिक मंचों से जुड़े वक्ताओं की जिम्मेदारी सामान्य लोगों से कहीं अधिक होती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार किसी को भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का उपहास उड़ाने की छूट नहीं देता।
अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा की प्रमुख मांगें:
धीरेंद्र शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण के त्रिभंग स्वरूप पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए बिना किसी किंतु-परंतु के तत्काल सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें।
यादव समाज, श्रीकृष्ण भक्तों और आहत सनातन धर्मावलंबियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपना खेद प्रकट करें।
भविष्य में सनातन धर्म के आराध्यों और परंपराओं के संबंध में ऐसी मर्यादाहीन बयानबाजी से पूरी तरह परहेज करें।
महासभा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि भगवान श्रीकृष्ण के सम्मान और सांस्कृतिक गौरव से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि इस पर उचित कदम नहीं उठाया गया, तो समाज इसे चुपचाप सहन नहीं करेगा।
