घर की चौखट से राष्ट्रीय बाजार तक: बिहार सरस मेला में 15 राज्यों की महिला उद्यमियों ने पेश की स्वावलंबन की मिसाल
पटना – ग्रामीण क्षेत्रों में आए बदलाव की बयार की जीवंत झलक ज्ञान भवन, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो रही है। कल तक जो हुनरमंद महिलाएं घर के अंदर तक ही सीमित थीं, आज वही महिलाएं एक कुशल उद्यमी के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं और आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं।
ज्ञान भवन, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला में ग्रामीण महिलाओं की इसी उद्यमशीलता की कहानी प्रदर्शित है। मेला ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा 29 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
मेले में 15 राज्यों की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपनी सफलता और आत्मनिर्भरता की दास्तां अपने-अपने प्रदेश के हस्तशिल्प, लोककला, उत्पादों और मशहूर व्यंजनों के साथ 135 से अधिक स्टॉलों पर प्रस्तुत कर रही हैं।
सरस मेला के प्रति लोग का बढ़ा आकर्षण, क्रेता और विक्रेताओं के बीच सेतु बना संवाद कार्यक्रम
मेला कई मायने में खास है।
यहां हुनर और उद्यमिता को प्रोत्साहन तो मिल ही रहा है, साथ ही यहां आने वाले हजारों आगंतुक अपने सैकड़ों वर्ष पुराने शिल्प, कलाकृतियों, संस्कृति, परंपरा और देशी व्यंजनों से भी रूबरू हो रहे हैं।
सरस मेला को लेकर लोगों में उत्साह लगातार बढ़ रहा है। मेले के तीसरे दिन मंगलवार को 25 लाख 37 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों एवं व्यंजनों की बिक्री हुई, जो अब तक की सबसे बड़ी दैनिक बिक्री है। इसके साथ ही तीन दिनों में कुल 68 लाख 56 हजार रुपये से अधिक का व्यवसाय हो चुका है। बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन आ रहे हैं और मेले का लुत्फ उठा रहे हैं।
मेले में केवल उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री ही नहीं हो रही, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बिक्री को बेहतर करने पर सुझावों का भी आदान-प्रदान हो रहा है। इसके लिए प्रतिदिन क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
इसी क्रम में बुधवार को ज्ञान भवन सभागार में जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग संस्था के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र आयोजित हुआ। इस सत्र में बिहार के पारंपरिक उत्पादों – भूंजा, सत्तू, आटा, मखाना, मेज, मक्का, चायपत्ती, प्रोटीन बार और हस्तशिल्प की गुणवत्ता बढ़ाने, उचित दर निर्धारण, ब्रांडिंग, बाजार और विपणन पर गहन चर्चा हुई।इस कार्यक्रम में उत्पादक दीदियों के साथ ही सत्तुज, एन.सी.डी.ई.एक्स लिमिटेड, एफ.पी.सी और प्लेटफार्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों ने सहभागिता दिखाई। क्रेताओं ने उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
सरस मेले में उत्पादों और व्यंजनों के साथ ही खादी के परिधानों की बिक्री जमकर हो रही है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल बनी हैं भागलपुर जिला के खरीक प्रखंड से आई श्रीमती अमृता देवी।अमृता देवी ने महज तीन दिनों में ढाई लाख रुपये से अधिक के कॉटन और खादी के कपड़ों की बिक्री की है।
अमृता देवी वर्ष 2018 से चंदा जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने जीविका के प्रोत्साहन और समूह से ऋण लेकर छोटे स्तर पर कॉटन एवं खादी के कपड़ों का व्यापार शुरू किया था। अपने हुनर और मेहनत से आज उन्होंने एक मिनी फैक्ट्री स्थापित कर ली है। इस फैक्ट्री में 24 से अधिक जीविका दीदियों और उनके परिजनों को रोजगार मिला हुआ है।
अमृता देवी आज एक कुशल उद्यमी के तौर पर आत्मनिर्भरता, महिला स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण की मिसाल हैं। इस तरह सैकड़ों महिलाएं सरस मेला में हरेक स्टॉल पर ग्रामीण क्षेत्रों में आए बदलाव की गाथा प्रदर्शित कर रही हैं।
सरस मेला साबित कर रहा है कि जब महिलाओं को प्रोत्साहन और अवसर मिलता है, तो वे अपनी तकदीर तो बदल ही सकती है , सामाजिक ताना-बना से बाहर निकलकर सामाज को भी नई दिशा दे सकती हैं l
