पटना/सहरसा, 10 सितंबर। बिहार की सियासत में बांकीपुर उपचुनाव में करारी हार और पीके की जीत पर एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। इस मामले में पहले सम्राट चौधरी ने जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर को ‘बेचारा’ कह कर पीके की जीत को आम बताने की कोशिश की वहीं इस पर करारा पलटवार करते हुए प्रशांत किशोर ने सहरसा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को’अनपढ़, और अपराधी’ तक कह दिया है।
सम्राट चौधरी ने कब और क्यों कहा ‘बेचारा’?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो दिन पूर्व समाचार एजेंसी ANI को दिए गए एक इंटरव्यू में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि यह सीट बीजेपी की अजेय सीट मानी जाती थी, जहां से नितिन नबीन जीते थे। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज ने बीजेपी को हरा दिया।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर द्वारा उन्हें ही मुख्य टारगेट बनाया गया पूरा चुनाव आपके इर्द-गिर्द घूमता रहा, इसके जबाव में सम्राट चौधरी ने कहा –
“मेरी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। मैं व्यक्तिगत राजनीति में यकीन भी नहीं रखता। जो बोल रहे हैं, उन्हें बोलने दीजिए। वो बेचारा है, चलिए उनको करने दीजिए, जो करना है।”
इसी इंटरव्यू में उन्होंने बांकीपुर की हार को बीजेपी के लिए ‘अलार्मिंग’ बताया और माना कि “हम लोगों से गलती हुई। हमारी सीट पर कोई जीत रहा है ये हमारे लिए चिंता का विषय है।”
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर पिछले एक साल से सम्राट चौधरी पर लगातार व्यक्तिगत हमले करते रहे हैं – 1995 के तारापुर हत्याकांड के आरोप से लेकर नाम बदलने, हत्यारा होने, मैट्रिक फेल और डिग्री के दावों तक।
सहरसा से प्रशांत किशोर का पलटवार
इस ‘बेचारा’ वाले तंज के दो दिन बाद आज सहरसा में प्रशांत किशोर ने तीखी प्रतिक्रिया दी हैं।
PK ने कहा –
“बिहार को सुधारने के संकल्प के सामने हमारे पास कोई चारा नहीं है और हम सम्राट चौधरी जैसे अनपढ़, अपराधी के हाथ में बिहार को छोड़कर जा नहीं सकते हैं। उस नज़रिए से हम बेचारे ही हैं।”
उन्होंने इसे अपनी मजबूरी बताया कि बिहार को ऐसे नेतृत्व के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता।
बाढ़ पर भी सरकार को घेरा
इसी दौरान PK ने बिहार में बाढ़ की स्थिति पर भी सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि “बिहार में पहली बार बाढ़ की स्थिति भयावह नहीं हुई है और कोसी क्षेत्र से ज़्यादा इस दर्द को कौन समझता है। सवाल नरेंद्र मोदी और सम्राट चौधरी से है कि 20 वर्षों से आपलोग सत्ता में हैं, आखिर बिहार को इस अभिशाप से कब राहत मिलेगी?”
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क्या है सियासी मायने?
यह महज शब्दों की लड़ाई नहीं है। बांकीपुर की जीत ने जन सुराज को पहली बार सत्ता पक्ष के किले में सेंध लगाने का आत्मविश्वास दिया है। सम्राट चौधरी का ‘बेचारा’ कहना, PK को गंभीर चुनौती न मानकर हल्के में लेने की रणनीति है – “मेरी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं” कहकर वे खुद को बड़ा दिखाना चाहते हैं।
वहीं प्रशांत किशोर का ‘अनपढ़, अपराधी’ और ‘बेचारे ही हैं’ वाला जवाब, उसी तंज को हथियार बनाकर अपनी ‘बिहार सुधारो’ वाली नैतिक बढ़त को स्थापित करने की कोशिश है। बाढ़ के मुद्दे को जोड़कर वे लड़ाई को व्यक्तिगत से हटाकर शासन के 20 साल के रिपोर्ट कार्ड पर ले जाना चाहते हैं।
