बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद ‘जन सुराज’ के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) बिहार की राजनीति में मुख्य विपक्षी धुरी के रूप में तेजी से उभरते दिख रहे हैं। बांकीपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मजबूत दुर्ग को ध्वस्त करने और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार की जमानत जब्त कराने के बाद जन सुराज ने राज्य के राजनीतिक विमर्श का रुख बदल दिया है।
उपचुनाव में मिली सफलता के बाद भी प्रशांत किशोर की सक्रियता लगातार बनी हुई है। बांकीपुर के 10,000 स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के रोडमैप और धन्यवाद यात्राओं के बीच, अब मधुबनी के चर्चित रौशन यादव कस्टोडियल डेथ मामले में प्रशांत किशोर के सीधे हस्तक्षेप ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

मधुबनी कस्टोडियल डेथ: पीड़ित परिवार के साथ SSP दफ्तर पहुंचे PK
मधुबनी में रौशन यादव की पुलिस हिरासत/कस्टडी में हुई मौत के मामले में न्याय दिलाने के लिए प्रशांत किशोर शनिवार को खुद पीड़ित परिवार को लेकर मधुबनी SSP कार्यालय पहुंचे। प्रशांत किशोर ने जिला पुलिस कप्तान (SSP) से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की।
प्रशासनिक बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “मधुबनी SSP ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़ित परिवार को 10 दिनों के भीतर न्याय दिलाने और पारदर्शी कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया है।”

इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन को सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा, “यदि दिए गए 10 दिनों की समय-सीमा के भीतर पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिला, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। 10 दिन बाद दोबारा मधुबनी SSP कार्यालय पहुंचकर पीड़ित परिवार के साथ बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।”
यादव वोट बैंक और राजनीतिक समीकरणों पर असर
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा हरे गमछे पर कटाक्ष करना और राजद नेतृत्व द्वारा अपने यादव वोट बैंक को बनाए रखने के लिए निरंतर यादव समाज के मुद्दे को हाथों हाथ लेना चलता रहा है। लेकिन मधुबनी के रोशन यादव मामले में पीके की इंट्री यहां के जातीय और राजनीतिक समीकरण प्रभावित करने जैसा है।
बिहार में यह घटनाक्रम केवल एक प्रशासनिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं:
परंपरागत वोट बैंक में सेंध का दावा: बांकीपुर चुनाव के दौरान यादव और मुस्लिम समाज के एक बड़े तबके द्वारा जन सुराज को समर्थन दिए जाने की चर्चाएं जोरों पर थीं। अब राजद के इस कोर वोट बैंक से जुड़े रौशन यादव के मुद्दे को सड़क पर उतरकर उठाने से राजद के नेतृत्व पर सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं।
विपक्ष के मुख्य चेहरे की होड़: राजद उम्मीदवार की जमानत जब्त होने के बाद आम जनता में यह बहस तेज हो गई है कि बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजद/भाजपा) के सामने विपक्ष का असली चेहरा कौन है।
सत्तारूढ़ दल और विपक्ष की प्रतिक्रिया: एक तरफ जहां राज्य सरकार और सत्ता पक्ष जन सुराज के बढ़ते प्रभाव को रोकने के कार्य योजना बनाने पर में लगा है, वहीं दूसरी तरफ राजद अपने आधार खिसकता देखकर भी क्या करे क्या करे वाली हड़बड़ाहट में दिख रहा है। कहीं भी विपक्ष अपनी निरंतरता बनाए रखने में पूरी तरह से असफल दिख रहा है। ऐसे में कस्टोडियल डेथ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रशांत किशोर की एंट्री ने राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
प्रशांत किशोर के इस आक्रामक रुख से यह स्पष्ट संदेश जा रहा है कि बांकीपुर उपचुनाव में मिली जीत के बाद जन सुराज राज्य भर में जनाधार बढ़ाने और शासन-प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाने के अपने अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। और बिहार की बदनाम छवि “जातीय राजनीति हावी” के मिथक को तोड़ने का हर जोर आजमाइश कर रहे हैं.
बांकीपुर की जीत के बाद आभार सभाओं से लेकर मधुबनी के रोशन यादव मामले में सड़क पर उतरकर प्रशासनिक जवाबदेही तय कराने तक, प्रशांत किशोर का यह आक्रामक अंदाज यह साफ संकेत दे रहा है कि वे बिहार में मुख्य विपक्षी दल की खाली पड़ी जगह पर कब्जा जमाने में कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं हैं।
