इंग्लैंड के वरिष्ठ कवि डॉ. कृष्ण कन्हैया का हुआ भव्य अभिनंदन
साहित्यकारों, कवियों और मनीषियों ने किया राष्ट्रभाषा के अमर साधक का स्मरण
भव्य कवि-सम्मेलन में देश-विदेश के रचनाकारों ने काव्य पाठ से बांधा समां
पटना, 18 जून: अर्थशास्त्र, इतिहास और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रकांड विद्वान तथा राष्ट्रभाषा हिंदी के अप्रतिम साधक साँवलिया बिहारी लाल वर्मा की 131वीं जयंती के अवसर पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा, अभिनंदन समारोह एवं राष्ट्रीय कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस त्रिवेणी समारोह में देश-विदेश के जाने-माने साहित्यकारों, न्यायविदों और प्रबुद्ध जनों ने शिरकत कर स्वर्गीय वर्मा के बहुआयामी व्यक्तित्व और देश के प्रति उनके अविस्मरणीय अवदानों को रेखांकित किया।
देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के अनुज और बिहार विधान परिषद के पहले स्नातक सदस्य थे साँवलिया जी: डॉ. अनिल सुलभ
समारोह की अध्यक्षता करते हुए बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने साँवलिया बिहारी लाल वर्मा के दिव्य और आकर्षक व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारत के उन विरले महापुरुषों में से थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र और राष्ट्रभाषा की सेवा में होम कर दिया.
डॉ. सुलभ ने उनके ऐतिहासिक संदर्भों को साझा करते हुए बताया:
“साँवलिया जी तिरहुत स्नातक-निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के लिए निर्वाचित होने वाले प्रथम माननीय सदस्य थे। वे देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के ममेरे अनुज थे और अपने अग्रज की ही भांति कुशाग्र बुद्धि के धनी थे। भारतीय विधि आयोग तथा बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के माननीय सदस्य के रूप में उनकी सेवाएं युगों-युगों तक याद रखी जाएंगी।”
डॉ. सुलभ ने आगे कहा कि सम्मेलन की स्थापना काल से ही साँवलिया जी का इससे गहरा जुड़ाव था। वे नवंबर 1927 में सोनपुर में आयोजित हुए ऐतिहासिक विशेष अधिवेशन के सभापति भी रहे थे। उन्होंने ‘यूरोपीय महाभारत’, ‘गीता-विश्वकोष’ और ‘अन्तर्राष्ट्रीय विधि’ जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक ग्रंथों की रचना कर हिंदी वांग्मय को समृद्ध किया।
व्यक्ति समाज में अपने कर्मों और गुणों से ही पूजित होता है: न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह
समारोह का विधिवत उद्घाटन करते हुए पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमुूर्ति मान्धाता सिंह ने कहा कि समाज में किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके ऊंचे पद से नहीं, बल्कि उसके उत्कृष्ट कर्मों और लोक-कल्याणकारी गुणों से होती है। साँवलिया बिहारी लाल जी एक ऐसे ही युगद्रष्टा साहित्यकार, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी और विद्वान थे, जिन्हें उनके महान और समाजोपयोगी अवदानों के कारण आज भी संपूर्ण समाज बेहद आदर के साथ याद करता है।
सात समंदर पार से आए डॉ. कृष्ण कन्हैया का हुआ नागरिक अभिनंदन
इस गरिमामयी अवसर पर बर्मिंघम, इंग्लैंड से विशेष रूप से पधारे प्रवासी भारतीय, वरिष्ठ कवि और चिकित्सक डॉ. कृष्ण कन्हैया का बिहार की साहित्यिक भूमि पर भव्य अभिनंदन किया गया। सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने उन्हें पारंपरिक अंग-वस्त्रम, पुष्प-गुच्छ और स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से प्रवासी कवि का स्वागत किया।
भव्य कवि-सम्मेलन: काव्य रश्मियों से आलोकित हुई साहित्य परिषद
श्रद्धांजलि सभा के उपरांत एक शानदार कवि-सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसकी शुरुआत सुप्रसिद्ध कवयित्री चंदा मिश्र की सुमधुर वाणी-वंदना (सरस्वती वंदना) से हुई। इसके बाद मंच पर उपस्थित वरिष्ठ कवियों और युवा रचनाकारों ने अपनी मर्मस्पर्शी व विचारोत्तेजक रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काव्य पाठ करने वाले प्रमुख रचनाकार:
डॉ. कृष्ण कन्हैया (इंग्लैंड से पधारे मुख्य अतिथि कवि)
बच्चा ठाकुर (वरिष्ठ कवि एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी)
डॉ. रत्नेश्वर सिंह
आराधना प्रसाद (प्रसिद्ध कवयित्री)
प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय
सिद्धेश्वर
कुमार अनुपम
इं. अशोक कुमार
विभारानी श्रीवास्तव
मृत्युंजय गोविंद
मिथिलेश कुमार सिन्हा
नीरव समदर्शी
इन्दुभूषण सहाय
सूर्य प्रकाश उपाध्याय
सुनीता रंजन
अश्विनी कुमार
समारोह के मंच का कुशल और जीवंत संचालन प्रख्यात कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने अपनी चिर-परिचित काव्यमयी शैली में किया। कार्यक्रम के समापन पर सम्मेलन के वरिष्ठ पदाधिकारी कृष्ण रंजन सिंह ने देश-विदेश से आए अतिथियों, कवियों और सुधी श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद-ज्ञापन किया।
