Wednesday, June 17, 2026
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मिट्टी बचाओ, खेती बचाओ: टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत

नई दिल्ली:

भारतीय कृषि के सामने खड़ी जलवायु परिवर्तन, घटती मिट्टी की उर्वरता, गिरते भूजल स्तर और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश में टिकाऊ (सस्टेनेबल) और मुनाफे वाली खेती की प्रथाओं को बढ़ावा देना है।

​इस अभियान का केंद्रीय संदेश है: “मिट्टी सुरक्षित रहेगी, तो खेती बचेगी, किसान समृद्ध होगा और राष्ट्र उन्नति करेगा।” कृषि विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि मिट्टी का स्वास्थ्य ही कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा की नींव है। अगर मिट्टी की उर्वरता में लगातार गिरावट आती रही, तो इससे फसलों की पैदावार कम होगी, खेती की लागत बढ़ेगी और भविष्य में खाद्य उत्पादन के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

​इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) की सक्रिय भूमिका

​इस राष्ट्रीय पहल के तहत, इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) किसानों के बीच मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग और आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां एक तरफ हरित क्रांति ने देश में खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाने में बड़ी मदद की, वहीं दूसरी तरफ रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग ने कई क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता को भारी नुकसान पहुँचाया है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल ने मिट्टी के पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ दिया है। इसके कारण मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों और जैविक कार्बन (organic carbon) के स्तर में कमी आई है, जिससे मिट्टी की जल धारण क्षमता (water-holding capacity) घट गई है।

​सॉयल हेल्थ कार्ड और प्राकृतिक खेती पर जोर

​इस अभियान का एक मुख्य फोकस सॉयल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) के उपयोग को बढ़ावा देना है। यह कार्ड किसानों को उनके खेतों की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और जरूरी उर्वरकों की मात्रा के बारे में वैज्ञानिक सिफारिशें प्रदान करता है। इस पहल के जरिए सरकार का लक्ष्य संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना, खेती की लागत को कम करना और लंबे समय तक मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बनाए रखना है।

​इसके साथ ही, अभियान में प्राकृतिक और जैविक खेती (organic farming) को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को गोबर की खाद, कंपोस्ट, वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) और हरी खाद के उपयोग की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता कम हो सके।

​जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक

​बढ़ते जल संकट को देखते हुए, इस अभियान में ड्रिप (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई), वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) और पानी की बचत करने वाली अन्य कृषि तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा, किसानों को बीज उपचार, आधुनिक बुवाई तकनीक, फसल विविधीकरण (crop diversification) और स्थानीय जलवायु के अनुकूल फसलों के चयन के बारे में शिक्षित किया जा रहा है।

​किसानों को नकली उर्वरकों और कीटनाशकों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट्स की पहचान करने और उनके सही उपयोग के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।

​”संतुलित उर्वरकों, सॉयल हेल्थ कार्ड, जैविक खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में काफी सुधार किया जा सकता है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बीच, मिट्टी का संरक्षण और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।”

– डॉ. पी. एस. गहलोत, प्रबंध निदेशक (MD), इंडियन पोटाश लिमिटेड

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