नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित किए जाने के बाद, देश भर के छात्रों और अभिभावकों में भारी असंतोष और निराशा का माहौल है। इस साल बोर्ड ने पहली बार बड़े पैमाने पर डिजिटल मूल्यांकन यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लागू किया था। लेकिन, यही आधुनिक तकनीक अब छात्रों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह बन गई है।
छात्रों और अभिभावकों का मानना है कि इस नए सिस्टम ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। छात्रों के असंतोष की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
1. उम्मीद से बेहद कम अंक और JEE पास छात्र भी फेल
नतीजे आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र अपने मार्क्स देखकर हैरान हैं। फिजिक्स, मैथ्स और केमिस्ट्री जैसे मुख्य विषयों में छात्रों को उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला उन छात्रों का है जिन्होंने JEE Main जैसी देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा तो पास कर ली है, लेकिन बोर्ड परीक्षा में उन्हें या तो बेहद कम अंक मिले हैं या फिर फेल कर दिया गया है। छात्रों का तर्क है कि जो छात्र राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा क्रैक कर सकता है, वह बोर्ड में फेल कैसे हो सकता है?
2. डिजिटल मूल्यांकन (OSM) में तकनीकी खामियां
छात्रों और अभिभावकों का सीधा आरोप है कि डिजिटल स्कैनिंग के दौरान बड़े पैमाने पर लापरवाही और तकनीकी गड़बड़ियां हुई हैं। कई छात्रों ने शिकायत की है कि:
- री-इवैल्यूएशन के दौरान जब उन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखीं, तो वे धुंधली (Blur) थीं।
- कई मामलों में एक छात्र के रोल नंबर पर किसी दूसरे छात्र की कॉपी अपलोड होने के आरोप लगे हैं।
- दिल्ली के एक मामले में तो खुद CBSE को यह मानना पड़ा कि छात्र के रोल नंबर पर गलत फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका अपलोड हो गई थी, जिसे बाद में सुधारा गया।
3. ‘स्टेप-वाइज मार्किंग’ की अनदेखी और ‘लॉटरी’ जैसा सिस्टम
नाराज छात्रों ने सोशल मीडिया पर “Our future is not a game” और “OSM is like a lottery” जैसे कैंपेन शुरू कर दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि स्क्रीन पर कॉपियां जांचते समय शिक्षकों ने ‘स्टेप-वाइज मार्किंग’ (हर सही कदम पर अंक देना) को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और कई सही उत्तरों को भी बिना देखे छोड़ दिया गया। छात्रों के मुताबिक, यह मूल्यांकन नहीं बल्कि किसी लॉटरी जैसा खेल बन चुका है।
4. भारी-भरकम फीस और पोर्टल का क्रैश होना
रिजल्ट से असंतुष्ट छात्रों ने जब अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी देखने और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करना चाहा, तो उन्हें एक नई मुसीबत का सामना करना पड़ा। बोर्ड का आधिकारिक पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था और पेमेंट फेल हो रही थी। हद तो तब हो गई जब कुछ छात्रों को चार विषयों की कॉपी देखने के लिए पोर्टल पर लाखों रुपये की फीस दिखाई देने लगी, जिसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
5. हर चौथे छात्र ने किया कॉपी के लिए आवेदन
इस रिजल्ट से छात्रों के बीच अविश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग हर चौथे छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने के लिए आवेदन किया है। इतनी बड़ी संख्या में री-इवैल्यूएशन के आवेदन आना खुद ब खुद इस बात का प्रमाण है कि छात्र अपने परीक्षा परिणामों से कतई संतुष्ट नहीं हैं।
बोर्ड की सफाई और छात्रों की मांग
दूसरी ओर, CBSE ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बोर्ड का कहना है कि सिर्फ जांचने का माध्यम (डिजिटल) बदला है, मार्किंग स्कीम नहीं। बोर्ड के अनुसार, 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करने के लिए 3 लाख शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई थी और पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित है।
हालांकि, बोर्ड के इस जवाब से छात्र संतुष्ट नहीं हैं। अब कई छात्र संगठन और अभिभावक मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा मूल्यांकन या विशेष परीक्षा का आयोजन किया जाए।
