जनहित सर्वोपरि: प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने पर रहेगा जोर।
सख्त रुख: नए आयुक्त ने साफ किया—विधि-व्यवस्था (कानून-व्यवस्था) के मोर्चे पर कोई समझौता नहीं होगा।
एक्शन प्लान: 19 मई से हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायतों में लगेंगे ‘सहयोग शिविर’।
पटना। भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी श्री मयंक वरवड़े ने पटना प्रमंडल के नए आयुक्त (कमिशनर) के रूप में प्रभार ग्रहण कर लिया है। पदभार संभालते ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं।
शनिवार को आयुक्त कार्यालय में निवर्तमान आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर से प्रभार लेने के बाद उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी। जनहित के मामलों को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा जाएगा।
छह जिलों की होगी सघन मॉनिटरिंग
नवनियुक्त आयुक्त श्री मयंक वरवड़े ने कहा कि पटना प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर—में चल रहे विकास कार्यों की विधिवत मॉनिटरिंग (अनुश्रवण) की जाएगी।
सरकार की कल्याणकारी और विकासात्मक योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से काम किया जाएगा, ताकि लक्षित वर्ग (जरूरतमंदों) को इसका सीधा लाभ मिल सके।
19 मई से ‘सहयोग शिविर’: 30 दिनों में होगा जन-समस्याओं का निपटारा
आयुक्त ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘सात निश्चय-3’ के सफल क्रियान्वयन को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में गिनाया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के आलोक में सात निश्चय-3 के सातवें निश्चय ‘‘सबका सम्मान, जीवन आसान’’ (ईज ऑफ लिविंग) के संकल्प को पूरा करने के लिए आगामी 19 मई से प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय मंगलवार को पंचायतवार ‘सहयोग शिविर’ का आयोजन किया जाएगा।
इस शिविर में जनता से जुड़े निम्नलिखित मामलों का त्वरित समाधान होगा:
राशन, पेंशन और सरकारी आवास योजनाएं
मनरेगा, भूमि विवाद और दाखिल-खारिज (म्यूटेशन)
स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल और सड़क निर्माण से जुड़ी समस्याएं
समय-सीमा तय: शिविर में दर्ज होने वाले परिवादों (शिकायतों) का निपटारा हर हाल में 30 दिनों के भीतर करना होगा और इसकी लिखित सूचना आवेदक को दी जाएगी। साथ ही पूरा डेटा ‘सहयोग पोर्टल’ पर अपलोड किया जाएगा। प्रमंडल के सभी जिलाधिकारियों (DM) को इसका कड़ा अनुश्रवण करने के निर्देश दिए गए हैं।
विधि-व्यवस्था पर ‘नो कॉम्प्रोमाइज’
सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए वरवड़े ने कहा कि विधि-व्यवस्था संधारण से किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में उतरकर आम जनता से नियमित संवाद करने और उनका फीडबैक लेने का निर्देश दिया है।
निवर्तमान आयुक्त को दी गई विदाई
पदभार ग्रहण करने के बाद नए आयुक्त ने कार्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और यहां की टीम भावना व कार्य-संस्कृति की सराहना की। वहीं, निवर्तमान आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यालय के कर्मियों ने भी पराशर के प्रेरणाप्रद नेतृत्व और कार्य-संस्कृति को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
