Saturday, April 25, 2026
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बिहार में बेलगाम अपराध: पुलिसिया इकबाल पर उठते गंभीर सवाल

बिहार में इन दिनों अपराधी बेखौफ हैं और पुलिस का डर कहीं गायब होता दिख रहा है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आती खबरें एक डरावनी तस्वीर पेश करती हैं, जहाँ अपराधी न केवल आम जनता को निशाना बना रहे हैं, बल्कि कानून के रखवालों पर भी हमला करने से नहीं हिचक रहे। चाहे वह अवैध शराब के कारोबारियों द्वारा पुलिस की पिटाई हो या वांछित अपराधियों को पकड़ने गई टीम पर हमला, वर्दी का खौफ कम होता नजर आ रहा है।

राजधानी पटना: त्वरित कार्रवाई बनाम बढ़ता दुस्साहस
अपराधियों के बढ़ते मनोबल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे अब भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी वारदात को अंजाम देने से नहीं डरते।

घटना: चार दिन पहले पटना के व्यस्ततम क्षेत्र रामकृष्णानगर में दोपहर के समय एक ज्वेलरी दुकान से लाखों की लूट हुई।

पुलिस की भूमिका: हालांकि पटना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 72 घंटों के भीतर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन सवाल यह है कि सुरक्षा के दावों के बीच अपराधियों में दिनदहाड़े लूट करने की हिम्मत कहाँ से आ रही है?

नालंदा: समाज और कानून को शर्मसार करती घटनाएँ
मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा से आई हालिया खबरें कानून-व्यवस्था की पोल खोलती हैं:
सरेआम दरिंदगी: एक महीने पहले एक महिला के साथ बीच चौराहे पर दुष्कर्म के प्रयास और उसका वीडियो वायरल करने की घटना ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया।

व्यवस्था की विफलता: 20 दिन पहले एक लाचार पिता ने अपनी बेटी के साथ होते अन्याय को देखा, लेकिन पुलिस के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। परिणामस्वरुप, न्याय की उम्मीद न देख बेटी ने आत्महत्या कर ली। यह घटना पुलिस के प्रति जनता के विश्वास की कमी को दर्शाती है।

अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और वायरल वीडियो
जमुई की ताजी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। महिसौड़ी चौक जैसे व्यस्त इलाके से दो सगी बहनों का दिनदहाड़े अपहरण होना प्रशासन की विफलता का प्रमाण है।

मनीष कुमार और उसके साथियों ने छोटी बहन की हत्या की धमकी देकर बड़ी बहन (15 वर्षीय छात्रा) के साथ लखीसराय के एक होटल में सामूहिक दुष्कर्म किया।

तकनीक का दुरुपयोग: अपराधियों की निर्भीकता का स्तर यह है कि उन्होंने इस कुकृत्य का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने आश्वासन दिया है कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और छापेमारी जारी है। हालांकि, जनता अब केवल बयानों और ‘खानापूर्ति’ वाली कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। उन्हें एक ऐसी कार्यप्रणाली की तलाश है जहाँ अपराध होने के बाद गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले पुलिस का ऐसा खौफ हो कि कोई कानून तोड़ने की हिम्मत न करे।

बिहार में बढ़ते अपराधों और वायरल होते वीडियो के बीच, पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ‘इकबाल’ (Authority) को बहाल करने की है। जब तक अपराधियों में कानून का भय और पीड़ितों में पुलिस के प्रति सुरक्षा का भाव पैदा नहीं होगा, तब तक न्याय की प्रक्रिया अधूरी ही रहेगी।

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