Thursday, April 23, 2026
Homeअपराधबिहार में 'खाकी' का इकबाल खत्म? 25-30 अपराधियों ने बम-गोली के शोर...

बिहार में ‘खाकी’ का इकबाल खत्म? 25-30 अपराधियों ने बम-गोली के शोर के बीच गांव को बनाया बंधक, मूकदर्शक बनी रही पुलिस

पटना/वैशाली: बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति अब केवल सवालों के घेरे में नहीं है, बल्कि पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। राजधानी पटना में दिनदहाड़े हुई स्वर्ण व्यवसायी से लूट की तपिश अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि वैशाली जिले के महानार (करनौती) में अपराधियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार कर दीं। यह कोई छिपकर की गई चोरी नहीं, बल्कि सरेआम सत्ता और कानून को दी गई चुनौती थी।

दहशत का वो एक घंटा: जब ‘सम्राट’ बन गए अपराधी

​वैशाली के महानार थाना क्षेत्र में जो हुआ, उसने ‘जंगलराज’ की यादें ताजा कर दी हैं। लगभग 25 से 30 की संख्या में नकाबपोश अपराधी अत्याधुनिक हथियारों और देसी बमों के साथ गांव में दाखिल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:

रणक्षेत्र बना गांव: अपराधियों ने दहशत फैलाने के लिए लगातार बमबाजी और दर्जनों राउंड फायरिंग की।

सीसीटीवी को ठेंगा: घर और दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के बावजूद अपराधियों के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उन्होंने स्वर्ण व्यवसायी के घर में घुसकर महिलाओं और परिजनों के साथ मारपीट की और करोड़ों के आभूषण व नकदी लूट ली।

पुलिस की सुस्ती: सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि वारदात के दौरान पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन पुलिस तब पहुंची जब अपराधी आराम से लूट का माल समेटकर रफूचक्कर हो चुके थे।

​दो दिन पहले पटना में हुई लूट और अब वैशाली का यह तांडव बताता है कि अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। चाहे मामला दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदातों का हो या सरेआम हत्याओं का, अपराधियों की निर्भीकता इस बात का प्रमाण है कि उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का रत्ती भर भी डर नहीं है।

​विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अब अपराधी ‘सम्राट’ बन चुके हैं। 21 वर्षों के शासन के बाद भी अगर जनता अपने घरों में असुरक्षित है और अपराधियों का मनोबल सातवें आसमान पर है, तो यह सीधे तौर पर नीतिगत और प्रशासनिक विफलता है।

​आज बिहार का स्वर्ण व्यवसायी हो या आम नागरिक, हर कोई डरा हुआ है। सरेआम कनपट्टी पर कट्टा सटा देना या गर्दन काटकर हत्या कर देना अब बिहार की ‘डेली हेडलाइन’ बन गई है। पुलिस की लापरवाही और जांच के नाम पर होने वाली खानापूर्ति ने आम जनमानस के विश्वास को हिला कर रख दिया है।

वैशाली और पटना की ये घटनाएं महज दो लूट नहीं हैं, बल्कि बिहार की सुरक्षा व्यवस्था की वो कड़वी सच्चाई है जो चीख-चीख कर बदलाव की मांग कर रही है। क्या प्रशासन सो रहा है या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है? यह सवाल आज हर बिहारवासी पूछ रहा है।

यह भी पढ़े

अन्य खबरे