Monday, April 20, 2026
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भाजपाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा में आपसी मतभेद और केंद्रीय नेतृत्व की शह

बिहार में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद भाजपा कोटे से मुख्यमंत्री बनाए गए सम्राट चौधरी का विरोध शुरुवात से बिहार के मूल भाजपाइ कर रहे है। लेकिन भाजपा केंद्रीय नेतृत्व इसे नजरंदाज कर बिहार में पिछड़ा और अति पिछड़ा मतदाताओं को साधने की रणनीति के तहत मूल भाजपाइयों का विरोध को शिरे से खारिज कर दिया ।

और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को राज्य का मुख्यमंत्री पद देने के साथ राज्य में सभी प्रमुख निर्णय लेने की खुली छूट दे दी है। और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इसी मौके का फायदा उठाने में लगे है।

हालांकि दो दिन बाद राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपना बहुमत सिद्ध करेंगे। इसमें भी भाजपा केंद्रीय नेतृत्व कोई करिश्मा होने की मंशा पाल रखे है। विश्वास मत प्राप्त करने में NDA के घटक दलों के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पक्ष में विरोधी दल के भी कुछ विधायक मतदान करेंगे।

मतलब विपक्षी दलों के कुछ विधायकों के भाजपा में प्रवेश के अटकलें लगाए जा रहे है। इसीलिए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने सम्राट चौधरी को फ्री हैंड दे रखा है। जिससे विरोधी दलों में यह मैसेज जाए कि सम्राट चौधरी के हाथ में ही सबकुछ है। और भाजपा में अन्य दलों से आए लोगों को महत्व मिलता हैं।

इसी के तहत एकमात्र सम्राट चौधरी को भाजपा कोटे से मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई गई। अब सम्राट चौधरी अपने मर्जी से या फिर केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर बिहार भाजपा के मुख्य धारा के नेताओं का कद छोटा करते हुए नजर आ रहे है।

इसमें सबसे पहला नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पृष्ठभूमि से आए विजय कुमार सिन्हा का आता है। पिछले सत्र में उपमुख्यमंत्री के साथ राज्य के राजस्व मंत्री रहते हुए पूरे राजस्व विभाग में उन्होंने हड़कंप मचा दिया था। उनकी प्रखर कार्यशैली की बिहार की जनता के साथ विपक्षी नेताओं ने भी जमकर सराहना की थी।

लेकिन आश्चर्यजनक रूप से भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने गत 15 अप्रैल को आयोजित भाजपा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह में अन्य किसी भाजपा विधायक को शपथ नहीं दिलाई।

अब विजय कुमार सिन्हा के सुरक्षा में भी कटौती कर दी गई है। और राजस्व मंत्री रहते जो उन्होंने कुछ कड़े आदेश दिए थे, उन आदेशों को भी बदलने का आदेश खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विभाग के मुख्य सचिव सीके अनिल जारी कर रहे है।

यही हाल भाजपा कोटे से मंत्री रहे लगभग सभी विधायकों का है। इन सब में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। चर्चा है कि बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार असम और पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम आने के बाद ही होगा।

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