Saturday, April 18, 2026
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बिहार में नमामि गंगे प्रोजेक्ट की विश्व बैंक ने की सराहना; अब उद्योगों और हरियाली के काम आएगा एसटीपी का उपचारित पानी

पटना, 18 अप्रैल 2026: बिहार में गंगा की निर्मलता और जल प्रबंधन की दिशा में बुडको (BUIDCO) द्वारा किए जा रहे कार्यों पर अंतरराष्ट्रीय मुहर लगी है। विश्व बैंक (World Bank) की टीम ने 13 से 17 अप्रैल तक राज्य की विभिन्न नमामि गंगे परियोजनाओं का विस्तृत निरीक्षण किया और कार्यों की गुणवत्ता पर संतोष जताते हुए बुडको की सराहना की है।

​विश्व बैंक की टीम ने पांच दिवसीय दौरे के दौरान भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और पटना के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी मानकों की जांच की:

वाटर ट्रीटमेंट गुणवत्ता: उपचारित पानी के मानक और प्लांट की क्षमता।

रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: ऑनलाइन डेटा संग्रहण और निगरानी की व्यवस्था।

परिचालन क्षमता: प्लांट का रखरखाव और तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता।

निरीक्षण के बाद बुडको के प्रबंध निदेशक श्री अनिमेष कुमार पराशर के साथ हुई बैठक में जल पुनर्चक्रण (Water Reuse) पर विशेष चर्चा हुई। एमडी ने बताया कि अब एसटीपी से निकलने वाले साफ पानी को नदियों में बहाने के बजाय उसे उपयोगी बनाने की योजना है:

हरियाली: पार्कों और सरकारी परिसरों में सिंचाई के लिए इस पानी का इस्तेमाल होगा।

उद्योग: कारखानों को कम दर पर उपचारित पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

अन्य: सड़क सफाई और निर्माण कार्यों में इसका उपयोग कर भूजल पर दबाव कम किया जाएगा।

बुडको अब तकनीक को और आधुनिक बनाने जा रहा है। सभी एसटीपी को एक केंद्रीकृत स्काडा (SCADA) सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे एक ही कंट्रोल रूम से सभी प्लांट की गुणवत्ता, पानी के बहाव और पंपों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता में सुधार होगा।

​विश्व बैंक की टीम ने बिहार में एसटीपी की स्थिति को उम्मीद से बेहतर बताया। टीम ने जल उपचार के साथ-साथ उसके दोबारा इस्तेमाल (Reuse) की रणनीति की सराहना की और बुडको को भविष्य के लिए नए मानक स्थापित करने के सुझाव भी दिए।

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