राजेश सिन्हा
बिहार में अगले दो दिन में भारतीय जनता पार्टी के तरफ से नए मुख्यमंत्री की घोषणा हो जाएगी। बिहार के ज्यादातर राजनीतिक जानकारों का यह मानना है की बिहार में भाजपा के तरफ से अगले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का नाम लगभग है तय है
लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा अंतिम समय में चल रहे उठा पटक से यह साफ जाहिर हो गया है कि भाजपा की पसंद कोई और भी हो सकता है। आज ही बिहार में भाजपा के राज्य इकाई के विधायक दल का नेता चुने जाने के लिए केंद्रीय भाजपा नेतृत्व ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। और अगले दो दिन में नए मुख्यमंत्री का नाम भी निश्चित हो जाएंगा।
अब बात करते है विभिन्न राज्यों में भाजपा द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री के चुनाव के मापदंड पर। जिसमें सबसे प्रमुख बात जो केंद्रीय भाजपा नेतृत्व की प्राथमिकता दिखी है वो उस राज्य स्तरीय नेता को प्राथमिकता देती है जिसका अपना वजूद हो। छवि अच्छी हो और सबसे प्रमुख उस राज्य के प्रमुख सहयोगी दल की हा में हा मिलाने वाला नहीं हो।
इन सब मापदंडों में मुख्यमंत्री के सबसे प्रबल दावेदार सम्राट चौधरी नहीं बैठते है। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें चार माह पहले राज्य में गठित नई सरकार में उन्हें जेडीयू से लगभग छिन कर गृह मंत्रालय का पदभार सौंपा था।
शुरुआत उन्होंने अच्छी की थी लेकिन थोड़े दिन बाद ही वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू नेताओं के दबाव में आ गए। और अपनी बुल्डोजर वाली कार्रवाई पूरी तरह रोक दी।
इसके साथ अभी लगभग एक महीने तक चले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा में सम्राट चौधरी भी साथ रहे। और अनेक सभाओं में मुख्यमंत्री ने अगले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का नाम आगे किया। ये सब बातें भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में सम्राट चौधरी को नेगेटिव मार्क देता है।
भाजपा के मापदंड में उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा अगले मुख्यमंत्री के रूप में एक दम परफेक्ट बैठते है। बिना कोई तामझाम के राज्य के राजस्व मंत्री का कार्यभार संभालते ही नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की। बिना कोई समझौते के निरंतरता और राजस्व विभाग के भ्रष्ट कर्मचारी और अधिकारियों में हड़कंप।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा संघ और विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि से आते है और राज्य की राजनीति में मूल भाजपाइयों की पसंद है। ऐसे में उन्हें केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नजरंदाज नहीं किया जाएगा ऐसा लगता है।
इसके साथ संघ पृष्ठभूमि के युवा और दीघा से लगातार तीसरी बार पार्टी के विधायक संजीव चौरसिया पर भी भाजपा दाव लगाकर अति पिछड़ा कार्ड खेल सकती है।

वैसे दो दिन पूर्व दिल्ली से लौटने के बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का 24 घंटे का अज्ञात वास, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का कल जाकर राज्यपाल से मुलाकात और संजीव चौरसिया का पिछले एक महीने से सोशल मीडिया से दूरी के अलग अलग मायने हो सकते है। लेकिन हकीकत क्या है यह केंद्रीय भाजपा नेतृत्व द्वारा घोषणा के बाद ही पता चलेगा।
