पटना: बिहार की राजनीति में ‘परिवारवाद’ का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर एनडीए (NDA) सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर तीखा हमला बोला है। प्रियंका भारती का आरोप है कि भाजपा, जो खुद को परिवारवाद का कट्टर विरोधी बताती है, उसके दावों की पोल इस नए मंत्रिमंडल ने खोल दी है।
सिद्धांतों और व्यवहार में अंतर
राजद प्रवक्ता के अनुसार, एनडीए के नए मंत्रिमंडल में शामिल 25% से अधिक मंत्रियों (कुल 9 मंत्री) का चयन उनकी योग्यता के बजाय उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का ‘एंटी-परिवारवाद’ का नारा केवल चुनावी रैलियों तक सीमित है।
प्रियंका भारती द्वारा चिह्नित ‘परिवारवाद’ के प्रमुख चेहरे:
राजद प्रवक्ता द्वारा जारी वीडियो में सूची जारी करते हुए एनडीए के प्रमुख नेताओं को घेरे में लिया है:
सम्राट चौधरी (मुख्यमंत्री): प्रियंका भारती के अनुसार, मुख्यमंत्री खुद राजनीतिक विरासत की उपज हैं, क्योंकि उनके पिता शकुनी चौधरी राज्य के कद्दावर मंत्री रहे हैं।
नीतीश मिश्रा: पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र।
विजय चौधरी (उपमुख्यमंत्री): इनके पिता जगदीश चौधरी कई बार विधायक रह चुके हैं।
श्रेयसी सिंह: पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की पुत्री।
रमा निषाद: पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी।
अशोक चौधरी: इनके पिता महावीर चौधरी सांसद रहे हैं।
नीतीश कुमार और सहयोगियों पर सीधा प्रहार
राजद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सबसे बड़ा हमला बोलते हुए दावा किया कि उन्होंने अपने पुत्र निशांत कुमार को किसी भी सदन का सदस्य न होने के बावजूद मंत्रिमंडल में जगह दिलवाई है।
इसके अलावा, अन्य सहयोगियों पर भी निशाना साधा गया:
उपेंद्र कुशवाहा: अपनी पार्टी के चार विधायकों को दरकिनार कर अपने पुत्र दीपक प्रकाश को दूसरी बार मंत्री पद दिलाने का आरोप।
जीतन राम मांझी: अपने पुत्र संतोष मांझी को कैबिनेट में शामिल करवाकर ‘पुत्र-प्रेम’ को प्राथमिकता देने का आरोप।
“जो गठबंधन दिन-रात परिवारवाद को लोकतंत्र के लिए खतरा बताता था, आज उसी गठबंधन का 25% हिस्सा विरासत की राजनीति पर टिका है।” — प्रियंका भारती, प्रवक्ता, राजद
