पटना जिले के खुसरूपुर प्रखंड के बैकठपुर गांव के गंगा किनारे सैकड़ों एकड़ में फैला बैकठपुर दियारा का स्वरूप वर्षों से हो रहे मिट्टी कटाई से पूरी तरह से बिगड़ गया है
और इसका प्रभाव पवित्र गंगा नदी के किछाड़े पर भी पड़ रहा है। जहां निरंतर मिट्टी कटाई से घाटों का स्वरूप बिगड़ गया है। और आए दिन इन घाटों पर गंगा नदी में नहाने आने वाले श्रद्धालुओं के डूबने की घटनाएं होती रहती है।
ज्ञात हो कि खुसरूपुर प्रखंड में वैध एवं अवैध रूप से 20 से अधिक ईंट भट्ठे चल रहे हैं। और इन्हें ईट बनाने के लिए आवश्यक मिट्टी की आपूर्ति कुछ स्वार्थी स्थानीय लोग ऊपर से नीचे तक बैठे भ्रष्ट सरकारी विभागों के अधिकारियों के मदद से करते हैं।
क्योंकि बैकठपुर दियारा में सरेआम होने वाली मिट्टी कटाई की शिकायत निरंतर स्थानीय ग्रामीण द्वारा राज्य सरकार के खनन विभाग, राजस्व विभाग, स्थानीय पुलिस प्रशासन से की जाती रही है। लेकिन इन सरकारी कार्यालय में कभी भी कोई कार्रवाई किए जाने की सार्वजनिक जानकारी नहीं है।
गंगा किनारे में जमे पानी सूखने के बाद मिट्टी काटने का मौसम दिसंबर और जनवरी से ही शुरू हो जाता है। और फिर स्थानीय असामाजिक तत्व इस काम में लग जाते हैं। इस काम में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से इस अवैध मिट्टी खनन के समर्थन में रहता है।
और अनेक मामलों में खेत मालिक के बिना सहमति से रातों रात पूरे खेत की मिट्टी फसल सहित काट ली जाती है और खेत वालो को सुबह पता चलता है कि उसके खेत की मिट्टी काट ली गई है। वह जब इसकी शिकायत लेकर स्थानीय पुलिस थाने में जाता है तो इसकी कोई सुनवाई नहीं होने की बात अनेक ग्रामीणों ने कही है।
क्योंकि सैकड़ों एकड़ में फैला बैंकठपुर दियारा की जमीन लगभग 20-25 साल पहले राज्य सरकार ने यहां के गरीब और दलित परिवारों में बांट दिया था। लेकिन इसके कोई कागजात इन लोगों को उपलब्ध नहीं कराया था।
ऐसे में जब असामाजिक तत्व बिना उनके सहमति के उनके खेत की मिट्टी रातों रात काट लेता है। तो पुलिस भी उनके जमीन का कोई सरकारी कागजात नहीं होने के कारण बताकर उनकी शिकायत नहीं दर्ज करती है। ऐसे में मन मसोस कर चुपचाप बैठ जाना ही इन लोगों के पास एक मात्र विकल्प बच जाता है।
ऐसी ही एक घटना कल रात बैकठपुर निवासी गोविंद यादव के खेत में भी घटित हुई है। बिना उनकी सहमति से उनके जमीन में से 10 फीट से अधिक मिट्टी की कटाई रातों रात हो गई है।
अब उनका खेत एक 10 12 फीट गहरे गड्ढे में तब्दील हो गया है। उन्होंने इस बात की लिखित शिकायत गुरुवार को पटना जिला अधिकारी त्यागराजन एस एम से करने का निर्णय लिया है।
