Saturday, March 7, 2026
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पटना नीट छात्रा मामला: पीड़िता के परिवार को न्याय की नई आश, मनीष रंजन पर लगा पॉक्सो एक्ट

पटना नीट छात्रा बलात्कार एवं मृत्यु के मामले में पीडित पक्ष को न्याय की नई आस जगी है क्योंकि सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी मनीष रंजन पर पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब इस केस की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट में ही होगी।

ग़त 5 जनवरी को घटित इस घटनाक्रम को आज 6 मार्च को 2 महीने से अधिक का समय बीत गया है और इस मामले को स्थानीय पुलिस, सीआईडी, SIT और अब सीबीआई के पास इसकी जांच की जिम्मेदारी है। और इस शर्मनाक घटना के दो महीने का समय बीत जाने के बावजूद कोई विशेष सफलता इन तमाम जांच एजेंसियों के पास नहीं दिख रही है।

इधर इस मामले में शुरुआती दौर में ही स्थानीय पुलिस द्वारा पोक्सो एक्ट में गिरफ्तार संबंधित घटनास्थल शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन द्वारा अपने आप को निर्दोष बताते हुए जमानत याचिका दायर कर दी गई। और आश्चर्यजनक रूप से इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने भी कोर्ट को यह लिखित रूप से दे दिया की इस मामले में मनीष रंजन निर्दोष है और उसे जमानत मिल जानी चाहिए।

लेकिन आरोपी मनीष रंजन और सीबीआई की इन सिफारिश के विरुद्ध पीड़िता पक्ष के वकील एसके पांडे ने जोरदार ढंग से विरोध किया और पिछले तीन तारीखों में माननीय न्यायालय को मजबूर कर दिया कि आरोपी मनीष रंजन को जमानत नहीं मिले।

पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडे की ही कड़ी मेहनत का नतीजा था की हर तरह के प्रयास करने के बावजूद कथित तौर पर रसूखदार आरोपी मनीष रंजन को इस बार की होली जेल में ही रहकर बितानी पड़ी। अब यह सुनवाई आगामी 11 मार्च को होनी है।

आज पटना से निकलने वाले विभिन्न दैनिकों में यह खबर प्रमुखता से सीबीआई सूत्रों के हवाले से छपी है कि सीबीआई ने आरोपी मनीष रंजन पर पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और इसकी सुनवाई पोक्सो अदालत में ही चलेगी।

इसे पीड़िता पक्ष के लिए आंशिक जीत मानी जा सकती है। क्योंकि लड़ाई अभी लंबी है। जब तक इस मामले में संलिप्त सभी आरोपी के नाम का पर्दाफाश नहीं होता है और इन सभी को कड़ी सजा नहीं मिलती है। पीड़िता के परिजनों को न्याय मिल गया कहना गैर-वाजिब होगा।

क्योंकि सीबीआई ने भले ही इस मामले में एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन पर पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है लेकिन अभी तक आरोपी से कोई पूछताछ या जांच सीबीआई के तरफ से नहीं किए जाने की जानकारी मीडिया द्वारा ही दी जा रही है।

इस मामले में हॉस्टल संचालिका की भूमिका भी शुरुआत से ही संदिग्ध मानी जाती रही है। इसके साथ संदिग्ध अस्पताल प्रबंधन जहां पीड़िता को जख्मी हालत में अस्पताल में ले जाया गया था और संबंधित अस्पताल प्रबंधनों ने इस मामले की स्थानीय पुलिस को तुरंत सूचना नहीं दी थी।

सोशल मीडिया पर राज्य के अनेक नेता जिसमें प्रमुखता से नाम राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव का नाम लिया जा सकता है जो लगातार उनके पास इस मामले के पुख्ता सबूत होने का दावा कर रहे हैं सीबीआई ने इनसे भी कोई बात नहीं की है।

इसी तरह पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास भी इस मामले को लगातार सोशल मीडिया पर उठाते रहे हैं और कथित तौर पर उन्हें चुप करने के लिए उनकी नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी और फिर थोड़ी देर बाद रिहाई का नौटंकी भी पूरे बिहार ने देखा है। सीबीआई अगर सच में इस मामले की तह तक जाना चाहता है तो इन लोगों से भी पूछताछ और सबूत इकट्ठा करने की आवश्यकता है।

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