खुसरूपुर (पटना): दानापुर रेलमंडल के फतुहा-खुसरूपुर रेलखंड पर गुरुवार की अहले सुबह रेल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। 15623 डाउन कामाख्या एक्सप्रेस में लगभग आधा दर्जन हथियारबंद बदमाशों ने भीषण डकैती की घटना को अंजाम दिया। यह वारदात हरदासबीघा स्टेशन के समीप सुबह करीब 4:30 बजे हुई। यात्रियों का आरोप है कि घटना के वक्त न तो कोच में TTE मौजूद थे और न ही GRP/RPF का कोई जवान नजर आया।
योजनाबद्ध डकैती: AC कोच को बनाया निशानाजानकारी के अनुसार, बदमाशों की संख्या 5 से अधिक होने के कारण यह सीधे तौर पर डकैती का मामला है। अपराधियों ने पूरी योजना के साथ ट्रेन के एसी कोच (B1, B6, A1 और A2) में प्रवेश किया। जब यात्री गहरी नींद में थे, बदमाशों ने हथियारों के डर से उनके पर्स, मोबाइल और कीमती सामान लूट लिए। वारदात के बाद अपराधियों ने हरदासबीघा के पास चैन पुलिंग की और अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गए।
रेलवे की मुस्तैदी पर सवाल: न TTE मिले, न गश्ती दलट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों में रेल प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। यात्रियों का कहना है कि संकट के समय मदद के लिए कोई भी रेलकर्मी या सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था। मजबूरन, जोधपुर से कामाख्या की यात्रा कर रहे पीड़ित कमलेश कुमार ने ‘रेल मदद’ ऐप का सहारा लिया और ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। ऑनलाइन शिकायत के बाद ही रेल पुलिस हरकत में आई और छानबीन शुरू हुई।
प्रमुख बिंदु (At a Glance):
* अपराध की श्रेणी: कानूनी तौर पर डकैती (6 हथियारबंद अपराधी)।
* सुरक्षा में चूक: घटना के समय कोच से TTE और सुरक्षा बल (GRP/RPF) नदारद थे।
* समय व स्थान: गुरुवार सुबह 4:30 बजे, फतुहा-खुसरूपुर के बीच हरदासबीघा।
* शिकायत का माध्यम: यात्रियों ने ‘रेल मदद’ ऐप के जरिए पुलिस को सूचना दी।
यात्रियों की पीड़ा: “हम भगवान भरोसे थे”
पीड़ित यात्रियों ने बताया, “पटना से गाड़ी खुलने के बाद हम निश्चिंत थे कि अब सीधे न्यू बरौनी रुकेगी। लेकिन हरदासबीघा के पास अचानक अफरा-तफरी मच गई। अपराधी बेखौफ होकर सामान लूट रहे थे, लेकिन पूरे ट्रेन खंड में कहीं कोई सुरक्षाकर्मी नहीं दिखा। हम पूरी तरह भगवान भरोसे थे।
“जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
भगत की कोठी से कामाख्या जाने वाली इस साप्ताहिक ट्रेन में हुई डकैती ने दानापुर रेलमंडल के सुरक्षा दावों की हवा निकाल दी है। फिलहाल आरपीएफ और जीआरपी की टीमें ऑनलाइन आवेदन के आधार पर मामले की सघन छानबीन कर रही हैं। पुलिस यह जांच रही है कि:
* अपराधी ट्रेन में पटना से ही सवार हुए थे या बीच रास्ते में चढ़े?
* घटना के वक्त एस्कॉर्ट पार्टी अपनी ड्यूटी पर तैनात क्यों नहीं थी?
* टीटीई (TTE) अपनी निर्धारित बोगी से अनुपस्थित क्यों थे?
यह घटना रेल यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि समय रहते सुरक्षा कर्मियों ने गश्त की होती या टीटीई अपनी बोगी में मौजूद होते, तो शायद डकैतों के हौसले इतने बुलंद न होते।
