बेगूसराय सदर विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा भाजपा विधायक के कार्यकाल को लेकर एक तीखी आलोचना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। “बेगूसराय की जनता” नामक फेसबुक यूजर ने अपने अकाउंट से एक लंबा पोस्ट शेयर किया है, जिसमें विधायक के चयन की पृष्ठभूमि से लेकर पांच वर्षों के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट में 27-28 लोगों को टैग भी किया गया है, जिससे यह तेजी से चर्चा में आ गया।
पोस्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा विधायक न तो भाजपा के पुराने व जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं, और न ही उनका कोई सामाजिक संघर्ष का इतिहास है, बल्कि उन्हें “कृपा” से टिकट मिला और भाजपा की लहर पर सवार होकर जीत हासिल हुई।
लेखक का आरोप है कि यदि मौजूदा विधायक का व्यक्तिगत प्रभाव होता, तो उनके पिता को 2010 में विधानसभा और नगर निगम चुनावों में हार का सामना न करना पड़ता।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि —
1. विधायक ने आवास के बदले नकद राशि लेकर बेगूसराय के नागरिक का हक छीना।
2. विधायक निधि के कार्य अपने रिश्तेदार के माध्यम से कराए गए और कार्यकर्ताओं को दूर रखा गया।
3. विभिन्न सरकारी योजनाओं पर अपना नाम जोड़ने की होड़ रही, जबकि योजनाओं का स्पष्ट ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया।
4. चुनाव के समय बड़े-बड़े संस्थान लाने की घोषणा हुई, लेकिन कोई भी संस्थान स्थापित नहीं हुआ।
5. शहर को ‘पेरिस’ बनाने की घोषणा के बावजूद सड़कों और नालियों की स्थिति वर्षों से बदहाल है।
6. बड़े हादसों और आपदाओं के समय विधायक की अनुपस्थिति रही और जनता से सीधा संपर्क सीमित रहा।
7. भाजपा कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर निजी स्टाफ के माध्यम से संगठन पर पकड़ बनाई गई।
8. विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं पर दबाव डालने और मुकदमे दर्ज करवाने के आरोप लगाए गए।
पोस्ट के अंत में सवाल उठाया गया है कि क्या केवल भाजपा के नाम पर ऐसे प्रतिनिधि को फिर से चुना जाना बेगूसराय के हित में होगा?
हालांकि, इस पोस्ट पर विधायक की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सोशल मीडिया आलोचनाएं चुनावी माहौल में मतदाताओं के बीच बहस को तेज कर सकती हैं और उम्मीदवारों को अपना पक्ष रखने और अपना कार्यकाल में किए गए कामकाज का ब्यौरा आम लोगों में बताकर अपना बचाव करने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
