विष्णु नारायण चौबे
कभी सब्जी बेचने वाले और ई-रिक्शा चलाने वाले हरनौत के लाल झंडू ने इस बार पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। झंडू ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल में भारत के लिए पदक का खाता खोलकर शान से तिरंगा लहराया।
पैरा पावर लिफ्टिंग के हैवीवेट वर्ग में तीसरे स्थान पर रहते हुए झंडू ने देश के लिए कांस्य पदक हासिल किया। उसकी सफलता पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोशल मीडिया पर बधाई दी है। झंडू की सफलता से हरनौत में जश्न का माहौल है।
झंडू के माता-पिता अब भी हरनौत बाजार में एनएच के किनारे रेहड़ी पर आलू-प्याज बेचकर अपना परिवार चला रहे हैं। बड़े भाई कुंदन कुमार ने बताया कि झंडू ने मुकाबले से पहले फोन किया था। उसने बताया था कि रात 10 बजे से मुकाबला शुरू होगा।
हालांकि, रात को दो बजे मुकाबला शुरू हुआ। परिवार के लोग परिणाम जानने के लिए रातभर जागते रहे। मुकाबले से पहले उसने फोन कर मां का आशीर्वाद लिया था। मां ने पदक जीत कर लौटने का आशीर्वाद दिया था। मेडल जीतने के बाद उसने मां को फोन कर बताया कि आपके आशीर्वाद से पदक जीत गया हूं।
पांच साल की उम्र में पोलियो ने झंडू को दिव्यांग बना दिया था। लोगों के ताने और उस पर गरीबी की मार। माता-पिता के साथ आलू-प्याज बेचे। पर हार नहीं मानी। बिहार के नालंदा जिले के हरनौत के उसी झंडू कुमार ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में झंडे गाड दिए।
झंडू को बारम्बार सैल्यूट।
