पटना: बिहार की राजधानी और उसके आसपास के इलाकों को कचरा मुक्त बनाने तथा कचरे से बिजली उत्पादन की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। पटना नगर निगम (PMC) की अगुवाई में शनिवार को एक बेहद महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पटना और उसके आस-पास के 12 नगर निकायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जहाँ महत्वाकांक्षी ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ (Waste-to-Energy) परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।
नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस पूरी योजना के सफल संचालन के लिए पटना नगर निगम को ‘लीड निकाय’ बनाया है। जल्द ही पटना नगर निगम और सभी 12 संबंधित निकायों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसके बाद इस योजना पर जमीनी काम तेजी से शुरू हो जाएगा।
इन 12 नगर निकायों का कचरा भी होगा प्रोसेस
बैठक में दानापुर निजामत, फुलवारीशरीफ, मसौढ़ी, संपतचक, फतुहा, खगौल, बिहटा, बख्तियारपुर, मनेर व नौबतपुर नगर परिषद के साथ-साथ पुनपुन और खुसरूपुर नगर पंचायत के अधिकारी व प्रतिनिधि शामिल हुए। इस परियोजना के तहत इन सभी 12 निकायों और पटना नगर निगम (कुल 13 निकाय) से निकलने वाले कचरे का शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निस्तारण किया जाएगा।
निकायों की जिम्मेदारी: सभी संबंधित नगर निकायों को अपने-अपने क्षेत्र से कचरा इकट्ठा करना होगा और उसे अपने संसाधनों से पटना के रामचक-बैरिया स्थित प्रस्तावित प्रोसेसिंग परिसर तक पहुंचाना होगा। इसके बाद कचरे से बिजली और खाद बनाने का काम शुरू होगा।
रामचक-बैरिया में स्थापित होगा अत्याधुनिक प्लांट
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली, 2026 के कड़े पर्यावरणीय मानकों के तहत रामचक-बैरिया में एक विशाल प्रोसेसिंग हब विकसित किया जा रहा है। इस हब में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:
15 मेगावाट क्षमता का वेस्ट-टू-एनर्जी विद्युत संयंत्र (कचरे से बिजली बनाने का प्लांट)
100 टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता का एक बायो-मीथेनेशन प्लांट
250 टीपीडी क्षमता की 3 मटेरियल रिकवरी/रिसाइक्लिंग फैसिलिटी (MRF)
50 टीपीडी क्षमता की 1 अतिरिक्त मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी
700 टीपीडी क्षमता की बड़ी कम्पोस्टिंग फैसिलिटी (खाद बनाने का प्लांट)
PPP (DBFOT) मॉडल: हैदराबाद की कंपनी करेगी संचालन
यह पूरी परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत DBFOT (Design, Build, Finance, Operate and Transfer) मॉडल पर आधारित होगी।
जमीन और डीपीआर: पटना नगर निगम रामचक-बैरिया में प्लांट के लिए भूमि देगा। इस परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना (DPR) हैदराबाद की प्रतिष्ठित कंपनी री-सस्टेनेबिलिटी (Re Sustainability) द्वारा तैयार की गई है।
निवेश और अवधि: कंपनी अपने खुद के वित्तीय संसाधनों से इस पूरे प्लांट का निर्माण और संचालन करेगी। इसके लिए पटना नगर निगम कंपनी को 22 वर्षों के लिए जमीन उपलब्ध कराएगा। इस अवधि में कंपनी कचरे से बिजली बनाएगी और तय समय सीमा खत्म होने के बाद पूरी परिसंपत्ति नियमों के मुताबिक हस्तांतरित कर दी जाएगी।
13 सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी रखेगी नजर
परियोजना में पूरी पारदर्शिता और तेजी बनाए रखने के लिए एक 13 सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया जाएगा।
अध्यक्ष: पटना नगर निगम के नगर आयुक्त।
सदस्य: शामिल किए गए सभी 12 नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी (Executive Officers)।
काम: यह हाई-लेवल कमेटी कंपनी के साथ अनुबंध से लेकर प्लांट के निर्माण, बिजली उत्पादन, खाद बनाने और पर्यावरणीय नियमों के पालन की हर स्तर पर नियमित समीक्षा और कड़ा पहरा रखेगी।
