बिहार की जीविका दीदियां: एक ने 10 रुपये की बचत से की शुरुआत, तो दूसरी का लॉटरी से खुली किस्मत, सुधा बिक्री केंद्र खोलकर खुद की बॉस बनीं
बिहार सरकार की मुख्यमंत्री पहल ‘सुधा सखी’ ग्रामीण महिलाओं को दे रही आत्मनिर्भरता की उड़ान
जहानाबाद की हीरामणि देवी की प्रेरणादायक कहानी: समूह में 10 रुपये जमा करने से हुई थी शुरुआत, आज खुद चला रही हैं अपनी दुकान
किशनगंज की रेशमा को लॉटरी से मिली घर के पास दुकान, बोलीं— “रोजगार देने के लिए मुख्यमंत्री भैया का दिल से धन्यवाद”
पटना | 15 अक्टूबर 2026: जीवन में सफलता पाने या आत्मनिर्भर बनने के लिए उम्र या हालात का कोई बंधन नहीं होता। अगर सरकार के मार्गदर्शन के साथ परिवार का संबल मिल जाए, तो इंसान किसी भी पड़ाव पर अपनी तकदीर खुद लिख सकता है। एक समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को रोजगार पाने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन बिहार सरकार की दूरदर्शी पहल अब इन महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।
इस पहल के तहत पंचायत स्तर पर ‘जीविका सुधा बिक्री केंद्र’ खोले जा रहे हैं, जहां महिलाएं घर के पास ही सुधा ब्रांड के दूध, दही, घी और अन्य डेयरी उत्पाद बेचकर न सिर्फ सम्मानजनक आजीविका कमा रही हैं, बल्कि अपने परिवार का मजबूत आर्थिक सहारा भी बन रही हैं।
10 रुपये की बचत से शुरू हुआ था हीरामणि देवी का सफर
जहानाबाद जिले के अमैन पंचायत के शाहपुर गांव की रहने वाली हीरामणि देवी के लिए यह योजना किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई है। उम्र के इस पड़ाव पर आकर खुद की दुकान चलाना उनके लिए एक सपने जैसा था।
‘गंगा जीविका स्वयं सहायता समूह’ की सदस्य हीरामणि देवी अपना अनुभव साझा करते हुए बताती हैं, “हमने समूह में 10 रुपये जमा करने से शुरुआत की थी। आज जीविका के माध्यम से मुझे सुधा दूध और अन्य सामानों की दुकान मिली है। इस उम्र में मुझे यह रोजगार मिला है, जिससे मैं घर-परिवार की देखभाल करते हुए भी दुकान से अच्छी कमाई कर पा रही हूँ।”
अमैन पंचायत की मुखिया इंदु देवी भी कहती हैं कि सरकार की इस पहल से महिलाओं का सम्मान और अभिमान दोनों बढ़ा है। अब महिलाएं अपने पंचायत में ही रहकर अपना सफल व्यवसाय चला रही हैं।
लॉटरी से खुला रेशमा की किस्मत का ताला: घर के पास ही मिला रोजगार
जहानाबाद की हीरामणि देवी की तरह ही किशनगंज जिले के बेलवा की रहने वाली रेशमा कुमारी की आँखों में भी आज एक अलग चमक है। कभी रोजगार के लिए परेशान रहने वाली रेशमा आज खुद की एक दुकान की मालकिन हैं।
‘दुल्हन जीविका स्वयं सहायता समूह’ की सदस्य रेशमा अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए कहती हैं, “मैंने जीविका सुधा बिक्री केंद्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था और फिर लॉटरी के माध्यम से मुझे यह केंद्र मिल गया। सबसे अच्छी बात यह है कि मैंने अपने घर के पास ही यह दुकान खोली है।” इस योजना से मिली आर्थिक आजादी ने रेशमा को इतना भावुक कर दिया कि उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ और रोजगार का यह साधन देने के लिए अपनी सरकार और मुख्यमंत्री भैया को दिल से धन्यवाद करती हूँ।”
जहानाबाद में 83 पंचायतों में शुरू हुए केंद्र
इस योजना के क्रियान्वयन के बारे में जहानाबाद के जीविका जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) विनय कुमार सिंह बताते हैं, “माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा जीविका दीदियों के स्वरोजगार हेतु यह बहुत ही महत्वपूर्ण योजना चलाई गई है। इसके तहत ‘कॉम्फेड’ (सुधा) के साथ मिलकर जीविका दीदियों को सुधा बिक्री केंद्र खोलने का अवसर दिया जा रहा है। हमारे जिले में कुल 88 पंचायतें हैं, जिनमें से 83 पंचायतों में हमने सुधा बिक्री केंद्र के लिए दीदियों का चयन कर लिया है और केंद्र सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। हीरामणि देवी का केंद्र भी इसी योजना का एक सफल हिस्सा है।”
क्या है योजना और कैसे मिलता है लाभ?
रेशमा और हीरामणि जैसी हजारों ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य की 8,053 ग्राम पंचायतों में जीविका सुधा बिक्री केंद्र स्थापित किए जाने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका बेहद आसान और मददगार वित्तीय मॉडल है:
कुल लागत: एक बिक्री केंद्र शुरू करने में कुल 75,000 रुपये का निवेश आता है।
सरकार की सहायता: इसमें से 60,000 रुपये की बड़ी सहायता राशि सरकार द्वारा दी जाती है। इस राशि का उपयोग डीप फ्रीजर, विजी कूलर, दुकान की ब्रांडिंग, पेंटिंग और परिवहन जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए किया जाता है।
लाभार्थी का अंशदान: महिला लाभार्थियों को अपनी ओर से मात्र 15,000 रुपये का अंशदान करना होता है।
कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना का लाभ लेने के लिए महिला का जीविका स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य होना अनिवार्य है।
अपने पंचायत क्षेत्र में स्वयं की या किराये पर एक दुकान उपलब्ध होनी चाहिए, जहाँ केंद्र का संचालन आसानी से किया जा सके।
आज बिहार की दीदियां यह साबित कर रही हैं कि यदि उन्हें सही अवसर और सरकार का थोड़ा सा संबल मिले, तो वे समाज में किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती हैं।
