राजेश सिन्हा
पटना: बिहार की राजनीति में एक आधिकारिक पत्र ने वह तूफान खड़ा कर दिया है जिसकी गूँज सत्ता के गलियारों से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। गृह विभाग द्वारा जारी एक पत्र, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे और उनकी सुरक्षा श्रेणी को Z+ करने का जिक्र है, अब विवादों के केंद्र में है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इसे ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इसे मुख्यमंत्री को जबरन पद से हटाने की एक बड़ी साजिश बताया है।
विवाद की जड़: पत्र में क्या है ‘विस्फोटक’?
गृह विभाग (विशेष शाखा) द्वारा जारी पत्र संख्या जी/वी०आई०पी०-01-01/2024 में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और निकट भविष्य में वह मुख्यमंत्री पद से त्याग-पत्र देकर राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इसी आधार पर उनकी सुरक्षा को “बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000” से बदलकर “Z+” श्रेणी में करने का निर्णय लिया गया है।
जेडीयू के तर्क: क्यों बताया जा रहा है ‘असंवैधानिक’?
जदयू नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस पत्र की टाइमिंग और शब्दावली पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
6 महीने का संवैधानिक अधिकार: संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी सदन का सदस्य नहीं भी रहता है, तब भी वह 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है। नीतीश कुमार ने 30 मार्च को विधान परिषद से इस्तीफा दिया है, ऐसे में उनके पास अभी भी पद पर बने रहने का पर्याप्त समय है।
प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन: किसी विभाग द्वारा यह ‘कयास’ लगाना कि मुख्यमंत्री कब इस्तीफा देंगे, प्रशासनिक मर्यादा के विरुद्ध माना जा रहा है। आमतौर पर मुख्यमंत्री का इस्तीफा एक राजनीतिक निर्णय होता है, न कि गृह विभाग की फाइलों में पहले से तय कोई प्रक्रिया।
जबरन पदमुक्त करने की कोशिश: जेडीयू खेमे में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि क्या प्रशासन या किन्हीं गुप्त शक्तियों द्वारा नीतीश कुमार पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है।
विश्लेषण: सुरक्षा की आड़ में ‘सियासी मैसेज’?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुरक्षा श्रेणी में बदलाव (मुख्यमंत्री एक्ट से Z+) का अर्थ है कि उन्हें ‘निवर्तमान मुख्यमंत्री’ की श्रेणी में मान लिया गया है। सुरक्षा बढ़ाना एक सकारात्मक कदम लग सकता है, लेकिन इसके पीछे का तर्क (इस्तीफे की भविष्यवाणी) सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा करता है।

यह पत्र महज एक प्रशासनिक सूचना है या बिहार में बड़े सत्ता परिवर्तन की पटकथा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन फिलहाल, इस पत्र ने मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग के बीच के तालमेल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नीतीश कुमार वाकई अपनी मर्जी से राज्यसभा जा रहे हैं, या यह ‘लेटर बम’ उन्हें किनारे करने की किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है?

बांका के वरिष्ठ जदयू नेता अनिल सिंह के अनुसार बिहार सरकार के किसी विभाग द्वारा जारी यह पत्र पूरी तरह से असंवैधानिक है। राज्य के महत्वपूर्ण, मुख्यमंत्री जैसे पद पर बने रहने के दौरान सरकारी विभाग द्वारा यह ‘कयास’ लगाना और फिर पत्र जारी करना कि मुख्यमंत्री कब इस्तीफा देंगे, यह पूरी तरह से प्रशासनिक मर्यादा के विरुद्ध है। उनके अनुसार आमतौर पर मुख्यमंत्री का इस्तीफा एक राजनीतिक निर्णय होता है, न कि गृह विभाग की फाइलों में पहले से तय कोई प्रक्रिया ।
