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Tuesday, September 29, 2026
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संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति के लिए कटघरे में खड़ा न करे कांग्रेस: महापौर सीता साहू

पटना: पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग (Election Commission) के कामकाज और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट और उस पर हो रही बयानबाजी पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए कटघरे में खड़ा करना लोकतंत्र के हित में नहीं है। यह विषय केवल किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आम जनता के विश्वास से जुड़ा है।

संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति के लिए कटघरे में खड़ा न करे कांग्रेस: महापौर सीता साहू

पटना: पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग (Election Commission) के कामकाज और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट और उस पर हो रही बयानबाजी पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए कटघरे में खड़ा करना लोकतंत्र के हित में नहीं है। यह विषय केवल किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आम जनता के विश्वास से जुड़ा है।

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आयोग के फैसले सर्वसम्मति से, फिर भ्रम क्यों?

महापौर सीता साहू ने कहा कि द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विपक्ष द्वारा आयोग के भीतर कथित मतभेद और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों एस.एस. संधू एवं विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने स्थिति स्पष्ट कर दी।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्वाचन आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लेने की बात स्पष्ट कर दी है, तो फिर कथित संस्थागत मतभेदों को आधार बनाकर भ्रम की स्थिति क्यों पैदा की जा रही है? उन्होंने कहा कि निर्णय प्रक्रिया के दौरान विभिन्न सुझाव या टिप्पणियां आना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

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कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र पर दी सफाई

कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए पत्र को लेकर उठे विवाद पर महापौर ने कहा कि आयोग के स्पष्टीकरण के अनुसार, इस पत्र का SIR या किसी चुनावी नीति से कोई संबंध नहीं था। यह प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से जुड़ा आंतरिक प्रशासनिक विषय था। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी प्रशासनिक पत्राचार को चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर आयोग की छवि धूमिल करना सर्वथा अनुचित है।

फॉर्म-6 और मतदाता अधिकारों पर भ्रामक प्रचार का खंडन

SIR प्रक्रिया के दौरान Form-6 और घोषणा पत्र में मनमाने बदलाव के आरोपों पर महापौर ने कहा कि यह दावा कि ‘आयोग ने चुपचाप नियम बदल दिए’, पूरी तरह बेबुनियाद है।

उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग का मूल उद्देश्य हर पात्र नागरिक की लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से घर-घर जाकर नए एवं छूटे हुए पात्र मतदाताओं को Form-6 उपलब्ध कराने और उन्हें मतदाता सूची में जोड़ने का पारदर्शी कार्य किया जा रहा है।

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कांग्रेस और विपक्ष को लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का अहसास

महापौर ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को नसीहत देते हुए कहा:

लोकतंत्र में सवाल पूछना सभी राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन आरोप लगाने से पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच करना भी एक संवैधानिक व लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है।

लगातार संवैधानिक संस्थाओं की साख पर हमला करने से आम नागरिकों का भरोसा इन संस्थाओं से उठ सकता है, जो देश के लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक है।

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