पटना: बिहार में किसानों को एक ही समन्वित व्यवस्था से सभी सरकारी सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। कृषि विभाग, मीठापुर, पटना में कृषि, राजस्व एवं भूमि सुधार तथा सहकारिता विभाग की संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई।
बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल और सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव मौजूद रहे।
बैठक का मुख्य एजेंडा था – किसान को उसकी जमीन से लेकर फसल की बिक्री तक हर स्तर पर सरकारी सिस्टम से जोड़ना।
बैठक के मुख्य फैसले:
1. फार्मर आईडी और योजनाओं का एकीकरण:
किसानों की डिजिटल पहचान – फार्मर रजिस्ट्री / फार्मर आईडी को मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य फसल बीमा, कृषि योजनाएं, संस्थागत ऋण और MSP पर खरीद जैसी सभी सुविधाओं को एक ही आईडी से जोड़ना है, ताकि पात्र किसानों को लाभ सीधे और समय पर मिल सके।
2. KCC से जोड़ने के लिए ब्लॉक स्तर पर विशेष कैंप:
अधिक से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जोड़ने के लिए प्रखंड स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।
3. जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण:
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ समन्वय कर भूमि रिकॉर्ड के सत्यापन और अद्यतन डेटा को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जाएगा। दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के साथ ही किसान रजिस्ट्री की प्रक्रिया को भी तेज किया जाएगा।
4. PACS और सहकारी बैंकों को मजबूत करना:
सहकारिता विभाग के माध्यम से पैक्स और सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा। इससे किसानों को समय पर KCC ऋण, उत्पादन में मदद, भंडारण की सुविधा और बाजार से जुड़ने में आसानी होगी। MSP पर खरीद और भुगतान की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने पर भी जोर दिया गया।
कृषि विभाग के अनुसार, तीनों विभागों के साझा प्रयास से अब तक बिहार में लगभग 54 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य इससे आगे बढ़कर एक ऐसी Integrated व्यवस्था बनाना है, जिसमें भूमि की सही जानकारी से लेकर ऋण और उपज के उचित मूल्य तक किसान को हर कदम पर सहयोग मिले।
