Friday, September 11, 2026
Homeबिहारआंगनबाड़ी कर्मियों को सरकारी कर्मी का दर्जा और सम्मानजनक मानदेय देने की...

आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकारी कर्मी का दर्जा और सम्मानजनक मानदेय देने की मांग, अररिया जिला सम्मेलन में संघर्ष तेज करने का संकल्प

बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन का अररिया जिला सम्मेलन संपन्न, नई कमेटी गठित; 19–20 सितंबर के राज्य सम्मेलन के लिए 21 प्रतिनिधि चयनित

अररिया, 11 सितंबर 2026। बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन का अररिया जिला सम्मेलन शुक्रवार को उत्साहपूर्ण और संघर्षशील माहौल में संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं से बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं ने भाग लिया। इस दौरान आंगनबाड़ी कर्मियों की लंबित मांगों, अधिकारों, मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और संगठन के विस्तार सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं सरकार की महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को गांव और समुदाय के स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद लंबे समय से कार्यरत इन कर्मियों को अभी तक नियमित सरकारी कर्मी का दर्जा नहीं मिला है। सम्मेलन में इस मांग को प्रमुखता से उठाते हुए सम्मानजनक और जीवनयापन योग्य मानदेय, सामाजिक सुरक्षा तथा पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई।

सम्मेलन को बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन के राज्य महासचिव कुमार बिंदेश्वर सिंह, राज्य उपाध्यक्ष पूनम श्रीवास्तव तथा राज्य नेता संजय कुमार भारती ने संबोधित किया।

40 वर्षों के संघर्ष की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने का आह्वान

राज्य महासचिव कुमार बिंदेश्वर सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन पिछले चार दशकों से सेविका-सहायिकाओं के अधिकार, सम्मान और बेहतर मानदेय के लिए लगातार संघर्ष करता रहा है।

उन्होंने कहा कि सेविकाओं का मानदेय ₹240 से शुरू होकर अब ₹4,500 तक पहुंचा है। उनके अनुसार यह उपलब्धि किसी सरकार की कृपा का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों से किए जा रहे आंदोलनों, संघर्ष और संगठन की एकजुटता का परिणाम है।

कुमार बिंदेश्वर सिंह ने कहा कि ICDS जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं की अहम भूमिका है। बच्चों, महिलाओं, पोषण तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों में उनकी जिम्मेदारी लगातार बढ़ी है, लेकिन इसके अनुरूप उन्हें अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।

उन्होंने 2015 और 2023 में हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन के संघर्ष के माध्यम से राज्य प्रोत्साहन राशि में वृद्धि समेत कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को कमजोर करने वाली कोशिशों का एकजुट होकर मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी एकता और संगठित संघर्ष है।

उन्होंने कहा, “अधिकार मांगने से नहीं, संगठित संघर्ष से हासिल होते हैं। आंगनबाड़ी कर्मियों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।”

सरकारी कर्मी का दर्जा देने की मांग

राज्य उपाध्यक्ष पूनम श्रीवास्तव ने सेविका-सहायिकाओं की एकता को मजबूत करने और जिले की सभी बाल विकास परियोजनाओं में संगठन का विस्तार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना में संगठन को मजबूत करते हुए अधिक से अधिक आंगनबाड़ी कर्मियों को संगठन से जोड़ना आवश्यक है।

उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों को गांव और परियोजना स्तर तक मजबूत करने तथा सेविका-सहायिकाओं की समस्याओं को सामूहिक रूप से उठाने का आह्वान किया।

मानदेय के साथ सामाजिक सुरक्षा की भी मांग

राज्य नेता संजय कुमार भारती ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं बच्चों, महिलाओं, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य के बावजूद आंगनबाड़ी कर्मियों को पर्याप्त मानदेय और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रखना उचित नहीं है।

सम्मेलन में प्रमुख रूप से निम्न मांगें उठाई गईं—

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं को सरकारी कर्मी का दर्जा दिया जाए।

उन्हें सम्मानजनक एवं जीवनयापन योग्य मानदेय दिया जाए।

सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

श्रम अधिकारों एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं का लाभ दिया जाए।

आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं

संजय कुमार भारती ने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों का सम्मान और अधिकार केवल उनके व्यक्तिगत हित का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की महिला एवं बाल कल्याण व्यवस्था से भी जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।

नई अररिया जिला कमेटी का गठन

सम्मेलन के दौरान सर्वसम्मति से बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की नई अररिया जिला कमेटी का गठन किया गया।

प्रमुख पदाधिकारी

अध्यक्ष: शबनम देवी
महासचिव: उमा देवी
कोषाध्यक्ष: अंजू देवी

उपाध्यक्ष

किरण कुमारी

श्वेता कुमारी

सुमन देवी

सचिव

रीना देवी

ललिता देवी

अंबिका देवी

कार्यकारिणी सदस्य

हुमा परवीन, नाजिश बानो, मंजू कुमारी, अनीता देवी, सीता देवी, श्वेता, सुमन, किरण कुमारी, अंजू देवी और बबीता देवी को कार्यकारिणी में शामिल किया गया।

इसके अलावा प्रवक्ता के रूप में प्रशांत कुमार और वीरेंद्र कुमार, मीडिया प्रभारी के रूप में दिलीप विश्वास तथा संयोजक के रूप में मनोज यादव को जिम्मेदारी दी गई। अन्य कुछ पदों को रिक्त रखा गया है।

संगठन विस्तार और चरणबद्ध आंदोलन का संकल्प

नवनिर्वाचित जिला कमेटी ने अररिया जिले की सभी बाल विकास परियोजनाओं में संगठन का विस्तार करने का संकल्प लिया। इसके साथ ही सदस्यता अभियान को तेज करने और सेविका-सहायिकाओं की स्थानीय समस्याओं को परियोजना, जिला और राज्य स्तर पर मजबूती से उठाने का निर्णय लिया गया।

कमेटी ने आंगनबाड़ी कर्मियों के लंबित अधिकारों और मांगों को लेकर आने वाले दिनों में संगठित एवं चरणबद्ध आंदोलन को मजबूत करने का भी संकल्प लिया।

पटना राज्य सम्मेलन के लिए 21 प्रतिनिधि चयनित

जिला सम्मेलन में आगामी 19 और 20 सितंबर 2026 को पटना में आयोजित होने वाले बिहार राज्य सम्मेलन के लिए अररिया जिले से 21 प्रतिनिधियों का चयन किया गया।

चयनित प्रतिनिधि राज्य सम्मेलन में जिले की आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं की समस्याओं, मांगों और संगठनात्मक मुद्दों को राज्य स्तर पर प्रस्तुत करेंगे। साथ ही आगे की संघर्ष की रणनीति तय करने में भी अपनी भूमिका निभाएंगे।

एकता और संघर्ष का संदेश

सम्मेलन के समापन पर नवनिर्वाचित जिला कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों ने संगठन को मजबूत करने, सदस्यता बढ़ाने और आंगनबाड़ी कर्मियों के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

सम्मेलन में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं को सरकारी कर्मी का दर्जा, सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा दिलाने की मांग को लेकर संगठनात्मक स्तर पर संघर्ष जारी रखा जाएगा।

सम्मेलन का मुख्य संदेश रहा—

“आंगनबाड़ी कर्मियों की एकता मजबूत करो — अधिकारों की लड़ाई तेज करो।”

“सरकारी कर्मी का दर्जा दो — सम्मानजनक मानदेय लागू करो।”

यह भी पढ़े

अन्य खबरे