Saturday, August 8, 2026
Homeबिहारराजद में बड़ा फेरबदल: प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर तक की सभी...

राजद में बड़ा फेरबदल: प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर तक की सभी कमेटियां भंग, लेकिन कार्यकर्ताओं ने शीर्ष नेतृत्व के इर्द-गिर्द बिचौलियों पर उठाए सवाल

पटना।

बिहार विधानसभा चुनाव में महज 25 सीटों पर सिमटने का झटका हो, बांकीपुर उपचुनाव में राजद प्रत्याशी की जमानत जब्त होने की शर्मिंदगी, या फिर हाल ही में बाहुबली नेता संजय टाइगर और शक्ति यादव के बीच उभरा विवाद—इन तमाम झटकों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का शीर्ष नेतृत्व आखिरकार हरकत में आ गया है। पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य से लेकर पंचायत स्तर तक की अपनी सभी कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।

प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव की सलाह पर यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने पूर्व में संगठन और प्रकोष्ठों से जुड़े जारी सभी आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। पार्टी का दावा है कि जल्द ही नए सिरे से मजबूत संगठन की घोषणा की जाएगी।

2022 से टल रहा था नया संगठन

गौरतलब है कि भंग की गई कमेटियां मूल रूप से वर्ष 2022 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के कार्यकाल के दौरान गठित की गई थीं। इसके बाद चुनाव को देखते हुए तेजस्वी यादव के निर्देश पर पुरानी कमेटी को ही पुनर्गठित कर काम चलाया जा रहा था। जून में मंगनी लाल मंडल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बावजूद नई कमेटी का गठन नहीं हो सका था, जिसे अब बांकीपुर उपचुनाव और विधानसभा चुनाव के खराब नतीजों के बाद पूरी तरह भंग कर दिया गया है।

कार्यकर्ताओं का आक्रोश: “मर्ज कहीं और, इलाज कहीं और”

एक तरफ जहां शीर्ष नेतृत्व इसे संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद बता रहा है, वहीं आम राजद कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर गहरा असंतोष और हताशा है।

पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का स्पष्ट मानना है कि:

शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं में बढ़ी दूरी: बिहार भर में राजद संगठन के कमजोर होने और चुनावी हार की मुख्य वजह खुद शीर्ष नेतृत्व और उनके इर्द-गिर्द जमा रहने वाला ‘सिंडिकेट’ है।

मुख्यालय के अवांछनीय तत्व हावी: पटना स्थित पार्टी मुख्यालय और केंद्रीय नेतृत्व के आसपास मौजूद कुछ खास लोग आम कार्यकर्ताओं की आवाज और जमीनी हकीकत को मुख्य नेता तक पहुंचने ही नहीं देते।

कार्रवाई का रुख गलत दिशा में: कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी की बदहाली के लिए जिम्मेदार मुख्यालय में बैठे अवांछनीय लोगों को हटाने के बजाय, पूरे राज्य के समर्पित संगठन को बर्खास्त कर देना पार्टी नेतृत्व की हताशा को दर्शाता है।

नए पुनर्गठन से कितनी बदलेगी तस्वीर?

लगातार मिल रही राजनीतिक हार और आंतरिक कलह के बीच राजद ने संगठन भंग कर अपनी सक्रियता तो दिखाई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल नए चेहरों को कमेटियों में शामिल करने से पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत हो पाएगी? जब तक कार्यकर्ताओं और मुख्य नेतृत्व के बीच की दूरी को मिटाया नहीं जाता और मुख्यालय के इर्द-गिर्द हावी बिचौलियों पर नकेल नहीं कसी जाती, तब तक नए संगठन का प्रभाव सीमित ही रहने की आशंका है।

यह भी पढ़े

अन्य खबरे