Monday, July 13, 2026
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गयाजी में बिहार विधानसभा का दो दिवसीय ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ संपन्न

अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा— सदन की गुणवत्ता और लोकतांत्रिक विमर्श को मिलेगी नई ऊर्जा

गयाजी / पटना | 12 जुलाई 2026

​बिहार विधानसभा सचिवालय, बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) तथा लोकसभा सचिवालय के ‘प्राइड’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विधायकों का दो दिवसीय आवासीय “प्रबोधन कार्यक्रम” रविवार को गयाजी में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम दिन विधायकों को संसदीय परंपराओं, विधायी प्रक्रियाओं, विशेषाधिकारों और संसदीय समितियों की बारीकियों से अवगत कराया गया।

​दूसरे दिन की शुरुआत विधायकों द्वारा बिपार्ड परिसर में ब्रह्मयोनि पहाड़ी के निकट वृक्षारोपण के साथ हुई। इसके बाद तीन अलग-अलग महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

​1. प्रथम सत्र: विधायी एवं संसदीय प्रक्रिया

​इस सत्र में बजट निर्माण और वित्तीय प्रावधानों पर गहन चर्चा हुई:

अनुभव साझा किए: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सदस्य श्री तारकिशोर प्रसाद ने बजट निर्माण और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर अपने अनुभव रखे।

बजटीय प्रक्रिया की जानकारी: प्राइड (लोकसभा सचिवालय) के निदेशक पार्थो गोस्वामी ने बजट, सरकारी व गैर-सरकारी विधेयकों और विधायी प्रक्रिया के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

तकनीक का महत्व: सदस्य श्री संदीप सौरभ ने प्रश्नकाल की उपयोगिता पर विचार रखे, जबकि उमेश कुशवाहा ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने विधायी कार्यों को अधिक पारदर्शी और जनोन्मुख बनाया है।

2. द्वितीय सत्र: विशेषाधिकार एवं नवाचार

​इस सत्र में विधायकों के अधिकारों और लोकतांत्रिक तालमेल पर बल दिया गया:

जनता का विश्वास ही पूंजी: मुख्य वक्ता के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्षसतीश महाना ने कहा कि जनता का विश्वास ही जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

विधिक व्याख्या: पुलिस मुख्यालय के सहायक महानिदेशक (रेल) डॉ. कमल किशोर सिंह ने विशेषाधिकारों की विधिक व्याख्या की, जबकि राज्यसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव राघव प्रसाद दास ने संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी। इस दौरान सदस्य प्रफुल्ल कुमार मांझी ने भी अपने विचार रखे।


​3. तृतीय सत्र: संसदीय समितियां, कृत्य एवं सीमाएं

​लोकतंत्र में संसदीय समितियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने अपनी बात रखी:

वित्तीय अनुशासन: सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और जनता के प्रति संवेदनशीलता पर टिकी है।

सार्थक संवाद: सत्र में सदस्य दीपा कुमारी, कमरुल होदा और सतीश कुमार सिंह यादव ने भी अपने विचार साझा किए। सभी सत्रों के अंत में विधायकों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

उपराष्ट्रपति ने किया था उद्घाटन, सांस्कृतिक धरोहरों से भी रूबरू हुए विधायक

गौरतलब है कि इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन 11 जुलाई 2026 को भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा किया गया था। उद्घाटन के अवसर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह उपस्थित रहे थे। इस दौरान विधायकों को विष्णुपद मंदिर, महाबोधि मंदिर और मां मंगला गौरी मंदिर का भ्रमण भी कराया गया।

​पक्ष-विपक्ष की समान भागीदारी लोकतंत्र के लिए सुखद: डॉ. प्रेम कुमार

​सफल समापन के बाद बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बिपार्ड के आंबेडकर सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान कृषि मंत्री सह गया जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा और सांसद जगदंबिका पाल भी उपस्थित रहे।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, “यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि इस कार्यक्रम में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्यों ने समान उत्साह और सकारात्मक भावना के साथ भाग लिया। यह कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन न रहकर सार्थक संवाद का मंच बना। मुझे पूरा विश्वास है कि यहाँ से प्राप्त ज्ञान और अनुभव से सदन की कार्यवाही की गुणवत्ता तथा लोकतांत्रिक विमर्श की गरिमा को नई ऊर्जा मिलेगी।”

​अंत में विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेन्द्र नारायण यादव ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक सक्षम बनाने की एक सामूहिक पहल बताया। समापन समारोह में गयाजी की आयुक्त सफीना ए. एन., आईजी विकास वैभव, जिलाधिकारी शशांक शुभंकर और एसएसपी सुशील कुमार सहित बिपार्ड के अधिकारियों को सम्मानित किया गया।

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