बोले – ‘रक्षक जब भक्षक बन जाए तो समाज को खड़ा होना ही होगा’
शाहपुर (भोजपुर), 24 जून 2026।
भोजपुर जिले के शाहपुर में कथित पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात के बाद जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। परिजनों के घर सांत्वना देने पहुंचे प्रशांत किशोर ने वहां आयोजित ‘श्रद्धांजलि सह महापंचायत’ में हिस्सा लिया और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
‘छोटे पदाधिकारियों की बलि देकर बच रही सरकार’
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि प्रशासन इस पूरे मामले को ‘मिस-हैंडल’ कर रहा है। उन्होंने कहा, “जब समाज का दबाव बढ़ता है, तो सरकारें छोटे-मोटे अधिकारियों को सस्पेंड कर अपनी जान बचाना चाहती हैं। भरत तिवारी के परिवार को मुआवजा या नौकरी नहीं, बल्कि असली न्याय चाहिए।”
पीके ने अपनी मांग स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल थानेदार या डीएसपी पर कार्रवाई से न्याय नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया, “पटना में बैठकर उस युवक को मारने का आदेश किसने दिया? जो लोग हत्या की साजिश में शामिल हैं और जिनके इशारे पर यह एनकाउंटर हुआ, उन मास्टरमाइंड्स पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान पर कड़ा प्रहार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान को प्रशांत किशोर ने बेहद ‘असंवेदनशील’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग का अर्थ गोली चलाना नहीं, बल्कि समाज की रक्षा करना है।
पीके के सवाल:
क्या न्यायिक जांच में गृह मंत्री की भूमिका की जांच होगी?
क्या उस एसटीएफ अधिकारी पर कार्रवाई होगी जिसने पटना से आदेश दिया?
क्या उस मजिस्ट्रेट को जवाबदेह बनाया जाएगा जिसने गोली चलाने की अनुमति दी थी?
अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे भरत’
प्रशांत किशोर ने भरत भूषण तिवारी को एक जननायक बताते हुए कहा कि वह अपने लिए नहीं, बल्कि जमुनिया गांव के 80 विस्थापित परिवारों के अधिकारों के लिए लड़ रहे थे। उन्हें बिजली और पानी की सुविधा दिलाने के लिए संघर्ष करना ही शायद उनकी ‘गलती’ बन गई। उन्होंने आश्वस्त किया कि पीड़ित परिवार इस लड़ाई में अकेला नहीं है, पूरा समाज और जन सुराज उनके साथ खड़ा है।
यह मामला अब केवल एक एनकाउंटर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और सत्ता की जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभर रहा है।
