समस्तीपुर: बिहार से रोटी-बेटी की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करने वाले युवाओं के बीच एक खतरनाक प्रवृत्ति पैर पसार रही है। घर से दूर, बड़े शहरों की चकाचौंध और सामाजिक नियंत्रण के अभाव में कई युवा न केवल अपने लक्ष्य से भटक रहे हैं, बल्कि ‘दोहरी जिंदगी’ जीकर दो परिवारों को बर्बादी की कगार पर धकेल रहे हैं। इसका ताजा और शर्मनाक उदाहरण समस्तीपुर के शाहपुर पटोरी में देखने को मिला।
वरमाला के समय खुला ‘तमिलनाडु का राज’
लोदीपुर धीर गांव में बुधवार की रात खुशियों का माहौल था। दूल्हा पंकज कुमार अपनी नई नवेली दुल्हन को वरमाला पहनाने ही वाला था कि अचानक उसकी पहली पत्नी, नीलम देवी, वहां आ धमकी। नीलम ने न केवल शादी रुकवाई, बल्कि सबके सामने दूल्हे की पोल खोल दी। उसने बताया कि पंकज ने 6 साल पहले तमिलनाडु में उससे शादी की थी और वे वहां एक कपड़ा फैक्ट्री में साथ काम करते थे। उनके दो बच्चे भी हैं।
लक्ष्य से भटकाव और ‘मनचलेपन’ का शिकार युवा
यह मामला केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि उस गहरे सामाजिक संकट को दर्शाता है जिससे प्रवासी युवा जूझ रहे हैं। रोजगार के लिए दूसरे राज्यों (जैसे तमिलनाडु, महाराष्ट्र या दिल्ली) में जाने वाले युवा अक्सर वहां संघर्ष के बीच अकेलेपन का शिकार होते हैं। ऐसे में वे अपनी कार्यस्थली या आसपास रहने वाली महिलाओं से दोस्ती बढ़ाते हैं।
अक्सर यह दोस्ती ‘शादी के झांसे’ में बदल जाती है। बिना भविष्य की सोचे, ये युवा वहां शारीरिक संबंध बनाते हैं और कई मामलों में शादी कर घर बसा लेते हैं। लेकिन जब गांव से परिवार का दबाव आता है, तो वे अपनी पहली शादी और बच्चों की बात छिपाकर दूसरी शादी के लिए तैयार हो जाते हैं।
परिवार को झेलनी पड़ती है भारी फजीहत
इस ‘मनचलेपन’ और संयम की कमी का खामियाजा अंततः पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है। समस्तीपुर की इस घटना में भी यही हुआ:
सामाजिक अपमान: जैसे ही पंकज की सच्चाई सामने आई, लड़की पक्ष और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
हिंसा: आक्रोशित लोगों ने दूल्हे की जमकर धुनाई कर दी, जिससे उसका सिर फट गया। बारातियों को खदेड़ दिया गया।
कानूनी पचड़ा: दूल्हे के पिता को बंधक बना लिया गया और अंत में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। अब दूल्हा और उसकी पहली पत्नी दोनों पुलिस की हिरासत में हैं।
प्रवास के दौरान नैतिक मूल्यों का पतन और घर वालों से सच छिपाने की यह बीमारी बिहार के ग्रामीण अंचलों में ‘सम्मान’ की बलि ले रही है। समस्तीपुर की यह घटना उन तमाम युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो परदेस जाकर अपनी जड़ों और अपनी जिम्मेदारियों को भूल जाते हैं।
