राजेश सिन्हा
मोतिहारी: रोजी-रोटी की तलाश में अपने गांव-मिट्टी से दूर दूसरे शहरों में जाकर बसने वाले कुछ लोग जब अपनी मर्यादाएं और संस्कार भूल जाते हैं, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है, इसकी बानगी मोतिहारी के पहाड़पुर में देखने को मिली। गुड़गांव की चकाचौंध में एक महिला की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर उसे ‘पत्नी’ बनाकर रखने वाले युवक को अपनी असलियत छुपाकर दूसरी शादी करना भारी पड़ गया।
पीड़िता पूजा कुमारी (नाम परिवर्तित) असम की रहने वाली है और गुड़गांव में एक नामी कंपनी में नौकरी करती है। वहीं उसकी मुलाकात बलुआ गांव निवासी विशाल कुमार मिश्रा उर्फ विवेक मिश्रा से हुई थी। विशाल ने खुद को एक रसूखदार इंसान बताकर पूजा से नजदीकियां बढ़ाईं। पूजा एक बच्चे की अकेली मां थी, जिसका फायदा उठाकर विशाल ने उसे भरोसा दिलाया कि वह न केवल उसे अपनी पत्नी का दर्जा देगा, बल्कि उसके बच्चे को भी पिता का प्यार देगा।
विशाल के इन मीठे वादों में आकर पूजा ने उसके साथ जीवन बिताने का फैसला किया। आरोप है कि दोनों ने मंदिर में शादी भी की और पति-पत्नी की तरह रहने लगे। लेकिन जैसे ही घर पर विशाल की शादी दूसरी जगह तय हुई, वह पूजा को बिना बताए चुपचाप गांव लौट आया।
इधर विशाल अपनी दूसरी शादी की तैयारियों में व्यस्त था और बारात निकलने ही वाली थी, तभी पूजा अपनी आबरू और अधिकार की लड़ाई लड़ने मोतिहारी पहुंच गई। उसने गांव वालों और विशाल के परिवार के सामने गुड़गांव में बिताए पलों और शादी के फोटो सबूत के तौर पर पेश कर दिए। पल भर में ही ‘सज्जन’ दूल्हे का नकाब उतर गया और उसकी अय्याशी की कहानी पूरे गांव में फैल गई। गांववालो ने प्रेमिका को जबरन कहे या फिर समझा बुझा कर बारात लेकर पहुंच गए वधु पक्ष के यहां।
मामला तब और बिगड़ गया जब यह खबर वधू पक्ष तक जा पहुंची। वधू पक्ष ने पहले तो बारात का स्वागत नाश्ते से किया, लेकिन जैसे ही उन्हें दूल्हे के ‘डबल गेम’ का पता चला, उन्होंने शादी से साफ इनकार कर दिया। आक्रोशित लड़की वालों ने दूल्हे सहित पूरी बारात को बंधक बना लिया।
वधू पक्ष की मांग है कि शादी की तैयारियों में जो लाखों रुपये खर्च हुए हैं और जो दहेज दिया गया है, उसकी पूरी भरपाई होने के बाद ही बारात को मुक्त किया जाएगा। फिलहाल गांव में पंचायत बैठी है और भारी गहमागहमी का माहौल है।
यह घटना उन मनचलों के लिए एक कड़ा सबक है जो दूर शहरों में जाकर किसी महिला को अपनी हवस का शिकार बनाते हैं और समझते हैं कि गांव लौटकर वे बच निकलेंगे। यह खबर बताती है कि पाप का घड़ा एक न एक दिन जरूर फूटता है।
