राजेश सिन्हा
बिहार में महिलाओं से बढ़ रहे दुष्कर्म पर सरकार की पक्षपातपूर्ण नीति जिम्मेदार है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पटना नीट छात्रा दुष्कर्म और हत्या मामला है। जिसमें आरोपियों का बाल भी बांका ना हो इसका पूरा इंतजाम राज्य सरकार के तरफ से किया गया।
इसमें आरोपियों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्रकी सबसे विश्वसनीय जांच एजेंसी सीबीआई का उपयोग किया और इस घटना में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी को जमानत मिल जाए इसलिए सीबीआई ने 90 दिन बीत जाने के बावजूद माननीय पोक्सो न्यायालय में चार्ज शीट ही नहीं दायर की।
राज्य सरकार के इन्हीं पक्षपात पूर्ण और गंदी नीति के कारण राज्य के महिलाओं के प्रति कुंठित मानसिकता रखने वाले अपराधियों के हौसले बुलंद है। और राज्य के हर कोने से रोज महिलाओं, नाबालिगों से दुष्कर्म के साथ चार पांच साल की बेटियों से दुष्कर्म की खबरें अखबार की सुर्खियां बन रही हैं।
नया मामला फिर राजधानी पटना का ही है। जिसमें विजयवाड़ा से मोतिहारी स्थित अपने गांव जाने के लिए ट्रेन से पटना पहुंची 15 साल की नाबालिग बच्ची बेखौफ अपराधियों के दरिंदगी का शिकार हो गई।
ट्रेन से उतरने के दौरान उसका मोबाइल चोरी होने पर मदद का झांसा देकर एक आरोपी ने उसे विश्वास में लिया और शिकायत दर्ज कराने के नाम पर उसे पटना जंक्शन से गांधी मैदान ले गया। वहां पर उसने दूसरे दोस्त को बुलाया।
अपने उस दोस्त के साथ मिलकर नाबालिग के साथ पहले कार में, फिर बेउर स्थित एक मकान में सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। दरिंदगी की शिकार हुई पीड़िता की जब हालत बिगड़ने लगी तब, उसे दानापुर रेलवे स्टेशन के नजदीक छोड़ दिया। पीड़िता इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है।
दानापुर रेल पुलिस ने दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरा फरार है। आरोपितों की पहचान बेउर निवासी विकास उर्फ विजय और गर्दनीबाग के पवन राय के रूप में हुई।
इस मामले में दो आरोपितों की गिरफ्तारी भी हो गई हैं। और एक आरोपी को पुलिस जल्द गिरफ्तार भी कर लेगी। लड़की मोतिहारी की ओर केस चलेगा पटना में। ऐसे में आरोपितों को क्या सजा मिलेगी? कितने दिनों में फिर वे लोग आजाद होकर ऐसे अपराध को दुबारा अंजाम देंगे इसकी सच्चाई समझी जा सकती है।
बिहार में महिलाओं से अपराध करने में अपराधियों के हौसले बुलंद है। क्योंकि सरकार भले ही महिलाओं के भलाई की बात को लेकर योजनाओं का पिटारा खोलने का ढिंढोरा पीटे, लेकिन महिलाओं से निरंतर हो रहे अपराध रोकने के लिए ठोस नीति नहीं है। इसी लिए अपराधी बेखौफ है।
पिछले 15-20 दिन में सरेआम हत्या करने वाले अपराधियों में आतंक बनाने के लिए तीन एनकाउंटर हुआ। जिसमें दो अपराधियों की मौत हुई। कुछ ऐसी ही कार्रवाई महिलाओ से होने वाले अपराध में भी हो तो शायद इन अपराधों में कमी की गुंजाइश है।
