पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में मचे उथल-पुथल के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए (NDA) सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर तेजस्वी यादव ने सरकार की स्थिरता, नैतिकता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि मात्र 6 महीनों में ही बिहार की जनता इस ‘पथभ्रष्ट’ सरकार से उदासीन हो चुकी है।
तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि पिछले एक पखवाड़े से बिहार को केवल 3 लोग चला रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूर्ण मंत्रिमंडल और बिना किसी विमर्श के अलोकतांत्रिक तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं। तेजस्वी के अनुसार, सरकार के प्रथम वर्ष के कार्यकाल का लगभग 46.03% समय व्यर्थ हो चुका है, लेकिन सरकार के पास न तो कोई स्पष्ट नीति है और न ही कोई लक्ष्य।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक अस्थिरता पर प्रहार करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 10 बार सरकार का गठन और पुनर्गठन हुआ है। उन्होंने नीतीश कुमार को ‘चंचल व्यग्र मन का धनी’ बताते हुए कहा कि उनकी ‘क्षणभंगुर विचारधारा’ ने बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को अंधकार में धकेल दिया है, जिससे देश भर में बिहारवासियों का उपहास हो रहा है।
प्रशासनिक अराजकता और भ्रष्टाचार के आरोप
तेजस्वी यादव ने वर्तमान शासन को ‘बेलगाम नौकरशाही’ और ‘भ्रष्ट कार्य संस्कृति’ का केंद्र बताया। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि बिहार आज निम्नलिखित संकटों के दुष्चक्र में फंसा है:
- ध्वस्त विधि-व्यवस्था और अनियंत्रित भ्रष्टाचार
- वित्तीय कुप्रबंधन और अपारदर्शी कार्यशैली
- गरीबी, बेरोजगारी और बड़े पैमाने पर पलायन
तेजस्वी ने एनडीए सरकार को ‘संवेदनहीन’ करार देते हुए कहा कि यह सरकार आम जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय केवल तंत्र में बैठे लोगों का पोषण कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बिहार के युवा, महिला, किसान और व्यापारी अब इस सरकार से पूरी तरह नाउम्मीद हो चुके हैं। उनका अंतिम कटाक्ष था— “जो सरकार खुद अपने आप में एक समस्या है, वह जनता का क्या समाधान करेगी?”
