पटना। बिहार विधानसभा में विश्वास मत के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सत्ता पक्ष, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर प्रहार किए। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटने के लिए विवश किया है, क्योंकि उनका असली उद्देश्य नीतीश कुमार को राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक बनाना है।
तेजस्वी यादव ने सदन में कहा कि भाजपा के शीर्ष नेता सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे कि नीतीश कुमार 2030 तक एनडीए के नेता बने रहेंगे, लेकिन हकीकत में उन्होंने उन्हें पद से हटाकर किनारे कर दिया। तेजस्वी ने बिहार की राजनीतिक अस्थिरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने पिछले पांच वर्षों में पांच सरकारें देखी हैं, जो किसी भी प्रदेश के विकास के लिए शुभ संकेत नहीं है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर कटाक्ष करते हुए तेजस्वी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सम्राट जी लालू प्रसाद यादव की ‘पाठशाला’ से निकले हैं। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री को आगाह करते हुए कहा, “भाजपा और आरएसएस (RSS) में गहरी जड़ें रखने वाले पुराने नेता आपके उभार से खुश नहीं हैं। आपको अपने आसपास के उन्हीं लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।”
तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी के पिता शकुनि चौधरी के एक पुराने वीडियो का हवाला देते हुए भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि शकुनि चौधरी ने कभी नरेंद्र मोदी को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था, शायद उसी का डर है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उनके पुत्र को मुख्यमंत्री बनाकर मामला शांत करने की कोशिश की है।
अपने संबोधन में राजद नेता ने महिला आरक्षण के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आरक्षण देना काफी नहीं है, बल्कि इसे इस तरह लागू किया जाना चाहिए जिससे पिछड़ी और वंचित जातियों की महिलाओं को भी सत्ता और व्यवस्था में समान हिस्सेदारी मिल सके।
प्रमुख बिंदु:
राजनीतिक भविष्यवाणी: तेजस्वी ने दावा किया कि उन्हें पहले से पता था कि भाजपा नीतीश कुमार को टिकने नहीं देगी।
अस्थिरता पर वार: पांच साल में पांच बार सरकार बदलने को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा।
आरक्षण की मांग: वंचित वर्गों की महिलाओं के लिए ‘आरक्षण के भीतर आरक्षण’ की वकालत की।
