पटना, 10 अप्रैल 2026:
बिहार सरकार ने राज्य के बाहर स्थित बेतिया राज की संपत्तियों के प्रबंधन और विवाद निपटान को लेकर एक अहम फैसला लिया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि “बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाली नियमावली, 2026” के जरिए खासतौर पर उत्तर प्रदेश में स्थित संपत्तियों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है।
उन्होंने कहा कि यह नियमावली बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाला अधिनियम, 2024 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से बनाई गई है, जिससे वर्षों से लंबित मामलों के समाधान में तेजी आएगी।
उत्तर प्रदेश में संपत्तियों के लिए विशेष व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश में स्थित बेतिया राज की संपत्तियों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए राजस्व पर्षद के सचिव को विशेष अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी आपत्तियों की सुनवाई करेंगे और तय प्रक्रिया के तहत उनका निपटारा करेंगे।
यदि किसी पक्ष को इन संपत्तियों को लेकर आपत्ति होती है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेगा। विशेष अधिकारी को वही अधिकार दिए गए हैं, जो बिहार में संबंधित मामलों के निपटारे के लिए होते हैं।
स्वामित्व और बेदखली की प्रक्रिया भी तय
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई अधिभोगी संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में लेना चाहता है, तो संबंधित जिले के समाहर्ता (DM) द्वारा उसकी कीमत तय की जाएगी।
यदि राशि जमा कर दी जाती है, तो स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यदि राशि जमा नहीं की जाती, तो उत्तर प्रदेश के लागू कानूनों के तहत अधिभोगी को बेदखल कर संपत्ति का कब्जा सरकार को सौंपा जाएगा।
175 एकड़ से अधिक जमीन उत्तर प्रदेश में
बिहार सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बेतिया राज की कुल 175.53 एकड़ भूमि फैली हुई है, जिसमें प्रमुख जिले शामिल हैं:
गोरखपुर – 50.92 एकड़
कुशीनगर – 69.59 एकड़
इलाहाबाद – 26.56 एकड़
वाराणसी – 11.95 एकड़
महाराजगंज – 7.53 एकड़
बस्ती – 6.21 एकड़
अयोध्या – 1.86 एकड़
मिर्जापुर – 0.91 एकड़
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस नई नियमावली से लंबे समय से लंबित विवादों का समाधान होगा, संपत्तियों के उपयोग में पारदर्शिता आएगी
राज्य के बाहर की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा
सरकार का मानना है कि यह कदम बेतिया राज की संपत्तियों को कानूनी और व्यवस्थित तरीके से उपयोग में लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
