मुजफ्फरपुर, 30 मार्च 2026
बिहार में शराब माफियाओं और अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका ताजा उदाहरण मुजफ्फरपुर में देखने को मिला है। यहाँ शराब तस्करों ने न केवल उत्पाद विभाग की टीम की जान लेने की कोशिश की, बल्कि कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए थाने में ही ‘लूट’ की झूठी कहानी रच डाली। हालांकि, मीडिया की तत्परता और पुलिस के समन्वय ने तस्कर की इस शातिर चाल को नाकाम कर दिया।
स्टेशन से पीछा और खूनी संघर्ष की कोशिश
मामले की शुरुआत शनिवार (28 मार्च) की सुबह हुई। उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि मुजफ्फरपुर स्टेशन पर ट्रेन से विदेशी शराब की खेप उतारी गई है। जब तक टीम पहुँची, तस्कर शराब को एक लग्जरी कार में लादकर निकल चुके थे। उत्पाद विभाग की टीम ने मोतीझील बाजार से पीछा शुरू किया।
पकड़े जाने के डर से तस्करों ने अपनी कार की रफ्तार बढ़ा दी और पीछा कर रही सरकारी गाड़ी को जोरदार टक्कर मारकर उड़ाने की कोशिश की। इस जानलेवा हमले में विभाग की टीम बाल-बाल बची। अंततः, खुद को घिरता देख तस्कर कार छोड़कर फरार हो गए, जिसे विभाग ने जब्त कर लिया।
खुद बिछाए जाल में फंसा तस्कर
असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब तस्कर शिवम कुमार (निवासी रामपुर हरी) ने सोचा कि वह कानून को अपनी जेब में रख सकता है। अपनी लग्जरी कार को विभाग की जब्ती से बचाने के लिए वह सीधे बोचहां थाना पहुँच गया। वहाँ उसने आवेदन दिया कि कुछ अपराधियों ने हथियार के बल पर उसकी कार लूट ली है।
लेकिन तस्कर यह भूल गया था कि डिजिटल युग में खबरें उसके पहुँचने से पहले प्रसारित हो चुकी थीं। जी मीडिया पर कार पकड़े जाने की खबर देख चुके बोचहां थानेदार ने चतुराई दिखाई। उन्होंने तस्कर को बातों में उलझाकर थाने में बैठाया और तुरंत उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह को सूचित कर दिया।
”वर्दी और विभाग को जेब में समझते हैं माफिया”
यह घटना दर्शाती है कि बिहार में शराब माफिया किस कदर निडर हो चुके हैं। वे न केवल पुलिस टीम पर हमला करने का दुस्साहस करते हैं, बल्कि सरकारी तंत्र का उपयोग अपनी ढाल के रूप में करने की कोशिश भी करते हैं।
उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह के अनुसार: “शराब तस्कर शिवम ने चालाकी दिखाते हुए थाने में लूट की प्राथमिकी दर्ज करानी चाही, लेकिन वह अपनी ही चाल में फंस गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके सहयोगियों की तलाश जारी है।”
