बिहार के नालंदा से सांसद श्री कौशलेन्द्र कुमार ने देश की सबसे बड़ी पंचायत, लोकसभा में कुम्हार समाज की दशकों पुरानी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया। सांसद ने केंद्र सरकार से ‘माटी कला बोर्ड’ के गठन और कुम्हार जाति को अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में शामिल करने की महत्वपूर्ण मांग रखी।
सदन को संबोधित करते हुए सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि बिहार में कुम्हार समाज आज भी उपेक्षा का शिकार है। उन्होंने समाज की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा:
गांवों में कुम्हार समाज के लगभग 90% लोग आज भी अशिक्षित हैं।
समाज की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है।
कलाकारों के पास न तो मिट्टी उपलब्ध है और न ही मिट्टी पकाने के लिए जलावन की उचित सुविधा।
सांसद ने याद दिलाया कि बिहार सरकार के अनुग्रह नारायण सिंह समाज अध्ययन संस्थान द्वारा समाज से संबंधित विस्तृत ‘एथ्नोग्राफी रिपोर्ट’ पहले ही सौंपी जा चुकी है, लेकिन अब तक इसके कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। उन्होंने लंबित मांगों पर केंद्र और राज्य सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील की।
सांसद की इस ऐतिहासिक पहल का कुम्हार समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है।
श्रीमती शीला पंडित (सदस्य, बाल अधिकार संरक्षण आयोग) ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि सांसद ने मिट्टी से जुड़े कलाकारों की पीड़ा को सही मंच पर पहुंचाया है।
वरिष्ठ समाजसेवी सुरेंद्र प्रजापति ने कहा, “यह आवाज हाशिए पर रहने वाले मेहनतकश लोगों की सच्ची पुकार है, जिसने समाज में आशा की एक नई किरण जगाई है।”
राजू प्रजापति, कमलेश प्रजापति, डॉ. अरुण, माया देवी और सत्यदेव सुमन सहित समाज के कई गणमान्य व्यक्तियों ने सांसद के इस अटूट समर्थन के लिए उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद दिया है। जानकारों का मानना है कि ‘माटी कला बोर्ड’ का गठन ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
