बिष्णु नारायण चौबे
पटना/बिहार: बिहार में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत आम चुनाव 2026 की औपचारिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार का चुनाव न केवल तकनीक के मामले में आधुनिक होगा, बल्कि प्रशासनिक कसावट भी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
1. DM संभालेंगे कमान: प्रशासनिक ढांचा तैयार
चुनाव को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग ने सभी जिलों के जिला दंडाधिकारी (DM) को ‘जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत)’ नामित कर दिया है। वहीं, जिला पंचायत राज पदाधिकारी को उप-जिला निर्वाचन पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसकी आधिकारिक सूचना मुख्य सचिव और सभी संबंधित विभागों को भेज दी गई है।
2. तकनीक का तड़का: पहली बार मल्टी-पोस्ट EVM और चेहरा पहचान प्रणाली
इस बार का चुनाव ‘हाई-टेक’ होने जा रहा है:
मल्टी-पोस्ट EVM: अब बैलेट पेपर का जमाना गया। एक कंट्रोल यूनिट से 6 बैलेट यूनिट जुड़ी होंगी, जिससे मतदाता एक ही जगह से मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच समेत सभी पदों के लिए वोट डाल सकेंगे।
फेशियल रिकग्निशन (FRT): फर्जी मतदान और ‘बोगस वोटिंग’ पर लगाम लगाने के लिए बूथों पर चेहरा पहचानने वाली तकनीक का इस्तेमाल होगा। दोबारा वोट डालने की कोशिश करते ही सिस्टम अलर्ट जारी कर देगा।
3. परिसीमन पुराना, लेकिन आरक्षण रोस्टर होगा नया
एक बड़ा स्पष्टीकरण यह है कि चुनाव पुराने परिसीमन के आधार पर ही होंगे—यानी वार्डों और पंचायतों की सीमाएं नहीं बदलेंगी। हालांकि, आरक्षण रोस्टर में बदलाव निश्चित है। 10 साल के अंतराल के बाद रोटेशन नियम के तहत सीटों की आरक्षण स्थिति बदली जाएगी, जिससे स्थानीय राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
4. चुनाव का समय और पद
संभावित समय: नवंबर से दिसंबर 2026 के बीच मतदान होने की प्रबल संभावना है।
5) पदों की संख्या: राज्य भर में लगभग ढाई लाख (2.5 लाख) पदों पर चुनाव होगा। इसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के प्रतिनिधि चुने जाएंगे।
प्रशासनिक सक्रियता और तकनीक का समावेश यह संकेत देता है कि आयोग इस बार शून्य त्रुटि (Zero Error) के साथ चुनाव संपन्न कराने के संकल्प में है। जहाँ पुराने परिसीमन से उम्मीदवारों को भौगोलिक राहत मिली है, वहीं नया आरक्षण रोस्टर नए चेहरों के लिए दरवाजे खोलने वाला साबित होगा।
