बिहार में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा हाल के दिनों में सामने आई घटनाओं से लगाया जा सकता है। कहीं बालू माफिया, कहीं ड्रग तस्कर, तो कहीं शराब कारोबारियो को पकड़ने गई पुलिस टीमों पर अब सीधे हमले कर रहे हैं।
सबसे ताज़ा मामला मुजफ्फरपुर के गायघाट पुलिस स्टेशन क्षेत्र में मंगलवार रात का है, पोक्सो एक्ट के आरोप में एक वांछित रेप आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची मुजफ्फरपुर पुलिस पर आरोपी समर्थकों ने हमला कर दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर के गायघाट इलाके में पुलिस टीम एक पोक्सो एक्ट के आरोपी को पकड़ने गई थी। जैसे ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, आरोपी के समर्थक बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और पुलिस पर हमला बोल दिया।
जिसमें पुलिस टीम को घेरने की कोशिश, पत्थरबाजी और धक्का-मुक्की, गांव वासियों द्वारा आरोपी को बचाने का प्रयास किया गया। जिसके जवाबी कार्रवाई में पुलिस के गोली से गांव के बुजुर्ग की मौत हो गई। जबकि इस मामले में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
घायलों ने मृतक के सब को मुख्य सड़क पर रखकर सड़क जाम कर दिया। इस घटना ने साफ कर दिया कि अब अपराधियों को न केवल कानून का डर कम हो रहा है, बल्कि उन्हें स्थानीय समर्थन भी मिल रहा है।
कल राजधानी पटना में भी ऐसी ही एक गंभीर घटना हुई। यहां ड्रग कारोबार का गढ़ माने जाने वाला चीना कोठी स्लम एरिया में आरोपी को पकड़ने गई पुलिस पर भी स्थानीय लोगों ने पथराव कर दिया। और गिरफ्तार आरोपी आकाश को छुड़ाने का भरस क प्रयास हुआ। लेकिन पुलिस ने सतर्कता से आरोपी को पुलिस थाने ले आई।
ऐसे ही राजधानी पटना से सटे विक्रम के रानी तलब थाना के धनराज छपरा गांव में बालू माफियाओं पर कार्रवाई करने गई पुलिस पर माफियाओं ने जमकर पत्थरबाजी की और मौके से फरार हो गया। इस मामले में भी पुलिस किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता नहीं प्राप्त की है।
जबकि बेखौफ आरोपियों ने पुलिस की गाड़ियों की तोड़फोड़ करने के साथ पांच पुलिस वालों को भी पत्थरबाजी से गंभीर रूप से जख्मी कर दिया है। ऐसे ही शराब माफिया को गिरफ्तार करने या फिर विभिन्न मामलों में वांछित आरोपियों को गिरफ्तार करने गए पुलिस पर हमले की अनेक घटनाएं हैं।
अनेक स्थानीय लोगों के अनुसार पुलिस प्रशासन पर कड़े राजनीतिक हस्तक्षेप और पुलिस टीम के पास अपेक्षित औजार व अन्य अत्याधुनिक संसाधनों का अभाव के कारण स्थानीय स्तर की पुलिस समझौता कर या फिर इसे दूसरी भाषा में कहें तो भ्रष्ट नीति अपना कर अपना काम चलाने के लिए मजबूर है।
और स्थानीय अपराधी भी राज्य सरकार की गंभीर अपराधों पर ढुलमुल नीति का फायदा उठाकर सीधे पुलिस पर भी हमले करने से नहीं हिचकते हैं क्योंकि उन्हें पता रहता है कि जिस पुलिस पर वह हमला कर रहे हैं वे इस हमले के बाद शांत हो जाएंगे। बस कागजी कार्रवाई करेंगे। और उनके अवैध कारोबार निरंतर जारी रहेगा।
