पटना के नीट छात्रा के बलात्कार और हत्या मामले में दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई निष्कर्ष पर जांच एजेंसियां नहीं पहुंच पाई है। इस मामले में देश की सर्वाधिक विश्वसनीय कहीं जाने वाली जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) गत 12 फरवरी से जांच कर रही है।
लेकिन सीबीआई भी इस मामले में कोई नया अध्याय जोड़ने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। सीबीआई की जांच में कोई नयापन नहीं दिख रहा। CBI की पुरी जांच प्रक्रिया ही इस मामले की जांच कर चुकी SIT की जांच रिपोर्ट के इर्द गिर्द ही घूमती दिख रही है।
जिससे यह साफ दिख रहा है की बिहार के ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड जैसे महत्वपूर्ण मामलों में तह तक पहुंचने या हत्यारे की पहचान करने में पूरी तरह से असफल रही सीबीआई पटना नीट छात्रा मामले में भी अपने असफलता का इतिहास दोहराएगी।
पिछले लगभग 20 दिन से पोक्सो कोर्ट में इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही है। और इस सुनवाई में पटना पुलिस, SIT के साथ सीबीआई की संदेहास्पद भूमिका इन दिनों चर्चा में है।
सीबीआई ने अपने 1 महीने से अधिक के समय में इस मामले की जांच करने के बाद उन्हें जांच के लिए मनीष रंजन की कोई आवश्यकता नहीं होने की बात लिखित रूप से कोर्ट में दी है। जिससे मनीष रंजन की जमानत आसानी से हो जाए।
लेकिन पीड़िता के वकील, सरकारी वकील के निरंतर विरोध के साथ माननीय न्यायाधीश भी इस मामले के किसी भी पहलू को नजरअंदाज करते हुए नहीं दिख रहे हैं। जिससे हर तारीख पर पटना पुलिस, SIT और सीबीआई के कोर्ट में उपस्थित अधिकारियों को खासी फजीहत झेलनी पड़ रही हैं।
एक प्रश्न माननीय न्यायाधीश का जो इस मामले की सभी जांच एजेंसियों को उलझा कर रख रखा है वह यह है कि इस मामले में मनीष रंजन की गिरफ्तारी क्यों हुई?
और उसकी अगर गिरफ्तारी की गई तो उसे एक भी दिन के लिए रिमांड पर क्यों नहीं लिया गया? उसके मोबाइल लोकेशन और डिटेल की फोरेंसिक जांच क्यों नहीं करवाई गई? जिसका कोई जवाब इन जांच एजेंसीयो के पास नहीं है।
इस मामले में पीड़िता के पक्ष में शुरुआत से ही पटना, बिहार के साथ देश भर के संवेदनशील लोगों में रोष का माहौल है। और इसके समर्थन यानी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए के निरंतर प्रदर्शन और आंदोलन भी होते रहे है।
और इसे प्रतिउत्तर देने के लिए जांच एजेंसीया मीडिया का सहारा लेती रही है। अनेक बार पीड़िता के परिवार को प्रताड़ित करने ओर मृतक पीड़िता के बारे में शर्मिंदगी भरा मीडिया ट्रायल चलाने के अनेकों उदाहरण है।
और आज के मीडिया ट्रायल में SIT की रिपोर्ट को आधार बनाकर गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन कि गिरफ्तारी के बाद SIT ने क्या-क्या सवाल पूछा और मनीष रंजन ने क्या-क्या जवाब दिया इसका सिलसिले बार ब्यौरा चलाया गया है।
अब यहां यह जिक्र करना आवश्यक है कि SIT द्वारा अपनी रिपोर्ट बिहार सरकार के गृह मंत्रालय को सौंपने के बाद गत 30 जनवरी को राज्य के डीजीपी विनय कुमार ने पीड़िता के परिवार को अपने नीजी आवास पर बुलाया था।
और इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर वहां उन्होंने पीड़ित के परिजनों को यह समझाने की कोशिश की थी कि आप लोग यह मान लो कि आपकी बेटी ने आत्महत्या की है। यह बातें पीड़िता के परिजनों ने डीजीपी आवास से निकलने के तुरंत बाद मीडिया के सामने सार्वजनिक की थी।
SIT की रिपोर्ट भले ही सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन उस रिपोर्ट में क्या है? एसआईटी ने किसे आरोपी बनाया है? यह सब की बातों की जानकारी अनेक लोगों के साथ एसआईटी के साथ आरोपियों को शुरुआत से ही मदद करते हुए एक तरफ़ा खबर चलाने वाले कुछ पत्रकारों के पास भी है।
और वे SIT की रिपोर्ट के आधार पर वे लोग सरेआम मृतक पीड़िता के परिवार जनों को शर्मसार करने वाली बातें सरेआम अपने मीडिया ट्रायल में करते रहे हैं।
लेकिन इस रिपोर्ट में एसआईटी ने जिसे आरोपी बनाया है उसका कोई आधार नहीं बताया गया। मतलब बनाए गए आरोपी की डीएनए जांच के बाद कोई पुष्टि नहीं हुई थी और इसी कारण से यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक नहीं किया था।
मतलब दवा कर अपनी फजीहत बचा ली। और मामले से अपनी जान छुड़ाने के लिए सीबीआई को इसकी जांच की जिम्मेदारी दे दी गई।
अब सीबीआई की जांच रिपोर्ट में कुछ नयापन नहीं दिख रहा है। सीबीआई की पूरी रिपोर्ट पुरानी SIT की रिपोर्ट पर ही आधारित होने की बात इस मामले में कानूनी मदद कर रहे अनेक अधिवक्ता ने भी कही है।
ऐसे में पिछली तारीख को पीड़िता के मां ने जो सीबीआई पर इस मामले में लीपा पोती करने का आरोप लगाया है वह सच साबित होता दिख रहा है
चार साल पहले भूमिहार समाज के दिग्गज नेता ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड मैं सीबीआई की जांच सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गई थी।
मतलब राज्य भर में ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड मामले के विरोध में चल रहे उग्र आंदोलन को शांत करने के लिए राज्य सरकार ने भले ही सीबीआई जांच शुरू करवाई थी। लेकिन इस मामले में कोई सफलता नहीं मिलना सीबीआई के साख पर प्रश्न चिन्ह लगता है।
और आम लोगों में यह चर्चा अब बढ़ चढ़कर होने लगी है कि राज्य सरकार ने इस हाई प्रोफाइल बलात्कार और हत्या मामले में भी सीबीआई को सिर्फ और सिर्फ इसलिए बुलाया है कि मामला शांत कर दिया जाए। रफा दफा कर दिया जाए।
