पटना: नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत और कथित बलात्कार मामले में गुरुवार को बेऊर जेल में बंद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जो कुछ भी हुआ, उसने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों और पीड़िता की मां के बेबस आंसुओं ने इस केस को ‘इंसाफ बनाम सिस्टम‘ की लड़ाई बना दिया है।
कोर्ट के तीखे सवाल: “जब जांच नहीं की, तो मोबाइल सीज क्यों किए?”
गुरुवार को पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज का रुख काफी सख्त रहा। करीब 4 घंटे चली इस कार्यवाही में सीबीआई (CBI) के अधिकारियों को अदालत के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने आज भी अपना फैसला कल शुक्रवार तक के लिए टाल दिया है।
- डिजिटल साक्ष्यों पर सुस्ती: कोर्ट ने जब सीबीआई के एएसपी पवन श्रीवास्तव से पूछा कि क्या उन्होंने पीड़िता या मुख्य आरोपी मनीष रंजन के मोबाइल की जांच की, तो जवाब ‘नहीं’ में मिला। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब जांच ही नहीं करनी थी, तो इन्हें सीज करके मालखाने में क्यों रखा गया है?
- हत्या की धारा पर चुप्पी: छात्रा की मौत के बावजूद सीबीआई ने अब तक मामले को ‘हत्या’ (मर्डर) में क्यों नहीं बदला? इस सवाल पर एजेंसी के पास कोई ठोस जवाब नहीं था।
- गवाहों की अनदेखी: वार्डन का नाम गलत बताना और मुख्य चश्मदीद हो सकने वाली ‘मेड’ (कामवाली) का बयान यह कहकर न लेना कि वह “अनपढ़” है, सीबीआई की प्रोफेशनल जांच पर बड़े सवाल खड़े करता है।
मां का करुण क्रंदन: “गरीब की बेटी की कोई सुनवाई नहीं”
अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए पीड़िता की मां टूट गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार पुलिस, एसआईटी और सीबीआई सब मिलकर मामले को रफा-दफा करने में जुटे हैं।
”मेरी बेटी चली गई, लेकिन वहां रसूखदार नेताओं और मंत्रियों के बेटों का आना-जाना था। पुलिस ने एक मां को ही झूठा बना दिया है। नीतीश सरकार सोई हुई है और गरीबों के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा सिर्फ दिखावा है।”
भाषण देते-देते पीड़िता की मां कोर्ट परिसर में ही बेहोश हो गईं, जिससे वहां मौजूद लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष देखा गया।
सीबीआई ‘मुंह-तकवा’ की भूमिका में
तमाम उम्मीदों के विपरीत, सीबीआई इस संवेदनशील मामले में अब तक केवल एक ‘दर्शक’ या ‘मुंह-तकवा’ की भूमिका में नजर आ रही है। 20 दिनों का समय बीत जाने के बाद भी एजेंसी के पास न तो मौत की स्पष्ट वजह है और न ही उसने महत्वपूर्ण डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया है।
