पटना। पटना में जहानाबाद की नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों और आम जनता के बीच अब भारी संशय पैदा हो गया है। शुक्रवार, 27 फरवरी को सीबीआई की टीम पटना के विवादित प्रभात अस्पताल पहुंची, लेकिन वहां की कार्रवाई ने जांच की दिशा पर ही गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
नर्स से 5 घंटे पूछताछ, पर डॉक्टर और प्रबंधन ‘आजाद’?
मीडिया रिपोर्ट्स और अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई की टीम ने शुक्रवार को अस्पताल की एक नर्स (महिला स्टाफ) से लगभग 5 घंटे तक सघन पूछताछ की। नर्स ने जांच टीम के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि जब छात्रा को अस्पताल लाया गया था, वह पूरी तरह अचेत थी और उसके शरीर पर चोट के निशान थे।
नर्स के अनुसार अस्पताल के ही सभी कर्मी यह आपस में चर्चा कर रहे थे कि लड़की के साथ बहुत गलत हुआ है। हैरानी की बात यह है कि उसी नर्स ने यह भी जानकारी दी है कि सीबीआई ने अब तक अस्पताल के डॉक्टरों या प्रबंधन से कोई पूछताछ नहीं की है।
ऐसे में सीधा सवाल यह उठता है कि जिस अस्पताल में छात्रा का शुरुआती इलाज हुआ और जहां उसकी स्थिति को लेकर सबसे महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद है, वहां के जिम्मेदार डॉक्टरों को जांच के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है?
शुरुआत से ही संदिग्ध रही है अस्पताल की भूमिका
इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पहले दिन से ही सवालों के घेरे में रही है। घटना से जुड़े कुछ प्रमुख बिंदु अस्पताल की संदेहास्पद कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर दर्शाते हैं:
* पुलिस को सूचना न देना: जब छात्रा को जख्मी और गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया, तो नियमानुसार अस्पताल को तुरंत पुलिस को सूचना (MLC) देनी चाहिए थी, जो कि नहीं दी गई।
* परिजनों के गंभीर आरोप: पीड़िता के परिवार वाले शुरुआत से ही चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि अस्पताल प्रबंधन ने साक्ष्यों को मिटाने और पीड़िता की स्थिति को छुपाने की कोशिश की।
परिजनों का सीधा आरोप है कि इलाज के नाम पर अस्पताल में छात्रा की ‘सोची-समझी हत्या’ की गई है।
* साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का अंदेशा:
छात्रा के कपड़ों और मेडिकल रिपोर्ट्स में जिस तरह की विसंगतियां पाई गई हैं, वे इशारा करती हैं कि अस्पताल के भीतर कुछ ऐसा हुआ जिससे यह साफ दिख रहा है कि इस मामले को दबाने की कोशिश की गई।
सीबीआई की चुप्पी पर उठते सवाल
एक तरफ सीबीआई पिछले 18 दिन से जांच के नाम पर छोटी-छोटी कड़ियों को जोड़ने का बहाना बना रही है, वहीं दूसरी ओर अब तक इस मामले के मुख्य संदिग्ध ‘अस्पताल प्रबंधन’ से दूरी बनाए रखना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।
नर्स से कथित तौर पर 5 घंटे पूछताछ का दिखावा की औपचारिकता और अस्पताल के मालिकों व डॉक्टरों से कोई पूछताछ नहीं इस मामले में अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट जैसा माहौल देना जैसा दिख रहा हैं। जो कि सीबीआई की जांच की पारदर्शिता पर चोट करता है।
मुख्य सवाल जो पीड़िता के परिवार के साथ अब जनता पूछ रही है:
* सीबीआई ने अब तक अस्पताल के मुख्य डॉक्टरों का बयान दर्ज क्यों नहीं किया?
* क्या रसूखदार अस्पताल प्रबंधन को बचाने के लिए जांच की दिशा मोड़ी जा रही है?
* घायल अवस्था में आई छात्रा की जानकारी पुलिस से क्यों छिपाई गई, इस पर प्रबंधन से जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई?
और सबसे बड़ा सवाल
* क्या सीबीआई को इस मामले में कथित तौर पर शामिल बड़ी मछलियों को बचाने के लिए यह मामला दिया गया है। या पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने???
पटना की पॉक्सो कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। कोर्ट द्वारा सीबीआई को जारी किया गया ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause) यह साफ करता है कि कहीं न कहीं CBI की जांच की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं। इसे माननीय न्यायालय ने भी माना है और संज्ञान लिया है।
और यदि समय रहते अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो इस होनहार छात्रा को न्याय मिलना नामुमकिन हो जाएगा।
