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Sunday, October 11, 2026
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बिहार में अतिक्रमण हटाओ अभियान: मीठापुर सब्जी मंडी में ‘अंधेरगर्दी’ पर प्रशासन क्यों मौन?

पटना: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद राज्य भर में सरकारी जमीन और सड़कों पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने का जो व्यापक अभियान शुरू हुआ है, उसे आम जनता के एक बड़े वर्ग से प्रशंसा और समर्थन मिल रहा है। दशकों से यातायात और जन-जीवन को बाधित करने वाले इस संकट को दूर करने के सरकार के प्रयास को विकसित बिहार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

हालांकि, इस ‘सफाई अभियान’ के बीच, राज्य की सबसे बड़ी मंडियों में से एक—मीठापुर सब्जी मंडी—की स्थिति प्रशासन की दोहरी नीति पर सवाल खड़े कर रही है।मीठापुर मंडी: अराजकता का केंद्रमीठापुर सब्जी मंडी, जो न केवल पटना बल्कि अंतर-राज्यीय व्यापार के लिए भी एक प्रमुख केंद्र है, यहाँ की स्थिति किसी खुली अराजकता से कम नहीं है।

यह मंडी मीठापुर फ्लाईओवर से लेकर पटना जंक्शन के पश्चिमी छोर तक लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है।सुबह 2-3 बजे से शुरू होने वाली थोक और खुदरा खरीदारी के कारण यह पूरा खिंचाव दिन भर भीषण जाम की चपेट में रहता है। सब्जी विक्रेताओं, खरीदारों के वाहन और स्थानीय निवासियों के वाहन सड़क पर ही अव्यवस्थित ढंग से खड़े रहते हैं, जिससे सामान्य आवाजाही पूरी तरह से ठप्प हो जाती है।

एक स्थानीय निवासी ने कहा, “पूरे शहर में कार्रवाई हो रही है, लेकिन मीठापुर में प्रशासन की आँखें बंद हैं। यहाँ वाहनों को एक किलोमीटर पार करने में घंटों लग जाते हैं। यह स्थिति बताती है कि कार्रवाई केवल उन लोगों पर हो रही है जिनका राजनीतिक या प्रशासनिक ‘पहुंच’ कम है।”

पुल के नीचे की भयावह स्थिति

मीठापुर सब्जी मंडी क्षेत्र में सबसे भयावह स्थिति जैन धर्मशाला के पास फ्लाईओवर के नीचे की है। पुल के नीचे की पूरी जगह पर स्थानीय दुकानदारों ने अवैध रूप से कब्जा जमा लिया है। उन्होंने यहाँ तक कि अपने सामने की सरकारी जमीन को भी अपने सामान और अस्थायी ढाँचों से घेर लिया है।

यातायात का संकट:

यहाँ से ऑटो रिक्शा और पिकअप वैन जैसे चार पहिया वाहनों का गुजरना एक परीक्षा जैसा होता है। संकरी गली में वाहनों की रेंगती हुई कतार मीठापुर चौराहे पर जाम का मूल कारण बनती है। * प्रशासन की अनदेखी: यदा-कदा दिखने वाले एक या दो यातायात पुलिसकर्मी इस विशाल अव्यवस्था को नियंत्रित करने में पूरी तरह अप्रभावी साबित होते हैं। उनका होना न होना एक समान है, जिससे यह साफ होता है कि या तो उनके पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं, या वे जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

दोहरी मापदंड पर उठे सवाल

जब एक तरफ प्रशासन छोटे दुकानदारों और सड़क के किनारे अतिक्रमण करने वालों पर कठोर कार्रवाई कर रहा है, तो दूसरी तरफ मीठापुर जैसी प्रमुख मंडी में इतनी बड़ी अव्यवस्था पर चुप्पी क्यों है?मीठापुर की यह स्थिति दर्शाती है कि शहर के यातायात को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले व्यावसायिक अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन अभी भी संकोच या दबाव में है।

यह विसंगति सरकार के ‘विकसित बिहार’ के सपने और आम नागरिकों की परेशानियों के बीच एक बड़ी खाई पैदा करती है।आवश्यकता है कि जिला प्रशासन मीठापुर सब्जी मंडी के क्षेत्र को एक ‘पायलट प्रोजेक्ट’ मानकर तत्काल और व्यापक कार्रवाई करे। केवल छोटे-मोटे ढाँचे हटाना नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की ट्रैफिक और पार्किंग समस्या का एक स्थायी समाधान खोजने की जरूरत है, ताकि बिहार के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में से एक को अराजकता से मुक्ति मिल सके।

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