Wednesday, June 17, 2026
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विश्व बैंक ने सराहा पटना नगर निगम का मॉडल

बिहार में पशुओं से उत्पन्न जैव अपशिष्ट (बायो वेस्ट) के वैज्ञानिक प्रबंधन का अध्ययन करने आई विश्व बैंक की दो सदस्यीय टीम ने पटना नगर निगम की कार्यप्रणाली की जमकर पीठ थपथपाई है। टीम ने रामचक बैरिया स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर तथा आधुनिक एनिमल क्रिमेटोरियम (पशु शवदाह गृह) का सघन निरीक्षण किया। विश्व बैंक की प्रतिनिधि जॉली ब्रूड ने विजिटर्स बुक में निगम के प्रयासों की सराहना करते हुए लिखा कि यहाँ की प्रयोगशाला, नसबंदी प्रक्रिया और अपशिष्ट प्रबंधन के उच्च मानक बेहद प्रभावशाली और प्रेरणादायक हैं।

एबीसी सेंटर और प्रदूषण मुक्त एनिमल क्रिमेटोरियम को बताया अनुकरणीय

पटना, 17 जून 2026

​बिहार में पशुओं से उत्पन्न जैव अपशिष्ट (बायो वेस्ट) के वैज्ञानिक प्रबंधन का अध्ययन करने आई विश्व बैंक की दो सदस्यीय टीम ने पटना नगर निगम की कार्यप्रणाली की जमकर पीठ थपथपाई है। टीम ने रामचक बैरिया स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर तथा आधुनिक एनिमल क्रिमेटोरियम (पशु शवदाह गृह) का सघन निरीक्षण किया। विश्व बैंक की प्रतिनिधि जॉली ब्रूड ने विजिटर्स बुक में निगम के प्रयासों की सराहना करते हुए लिखा कि यहाँ की प्रयोगशाला, नसबंदी प्रक्रिया और अपशिष्ट प्रबंधन के उच्च मानक बेहद प्रभावशाली और प्रेरणादायक हैं।

​आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैज्ञानिक बायो-वेस्ट डिस्पोजल

​निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने टीम को बताया कि शहर से प्रतिदिन लगभग 40 आवारा कुत्तों को एबीसी सेंटर लाया जाता है। यहाँ डॉग हॉस्पिटल की अत्याधुनिक लैब और ऑपरेशन थियेटर में उनकी नसबंदी (बर्थ कंट्रोल सर्जरी) की जाती है। सर्जरी के बाद पशुओं को चार दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है और पूरी तरह स्वस्थ होने पर वापस उनके मूल स्थान पर छोड़ दिया जाता है।

​इस प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले खतरनाक जैव अपशिष्ट को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से संग्रहित कर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) के इन्सिनरेटर में भेजा जाता है, जहाँ पर्यावरणीय मानकों के तहत इसका वैज्ञानिक निस्तारण होता है।

​वेट स्क्रबर तकनीक: बिना प्रदूषण 3 घंटे में बड़े पशुओं का दाह संस्कार

​विश्व बैंक की टीम ने निगम द्वारा संचालित देश के आधुनिक एनिमल क्रिमेटोरियम का भी जायजा लिया। यहाँ दो अत्याधुनिक विद्युत चालित भट्टियां (electric furnace) कार्यरत हैं, जिनमें हर दिन 5 से 6 मृत पशुओं का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

पर्यावरण अनुकूल तकनीक: क्रिमेटोरियम में वेट स्क्रबर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो दाह संस्कार के दौरान निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों को अवशोषित कर लेती है। इससे वायु प्रदूषण शून्य रहता है।

​यहाँ बड़े से बड़े पशु का दाह संस्कार महज तीन घंटे में पूरा हो जाता है। इसके बाद बची राख (जो कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम से भरपूर होती है) को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए बैरिया परिसर में ही वैज्ञानिक पद्धति से जमीन में दबा दिया जाता है।

​1200 टन कचरे के बाद भी परिसर दुर्गंध मुक्त

​विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने रामचक बैरिया स्थित ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षेत्र का भी दौरा किया। प्रतिदिन लगभग 1200 टन ठोस कचरा डंप होने के बावजूद पूरे परिसर में दुर्गंध न होने पर टीम ने विशेष संतोष और आश्चर्य व्यक्त किया। अधिकारियों ने टीम को यहाँ चल रहे लीगेसी वेस्ट ट्रीटमेंट, बायो-रिमेडिएशन, बायोमेथनेशन, कम्पोस्टिंग तथा मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

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