Monday, February 23, 2026
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नेतागिरी के चक्कर में DM ऑफिस के दो लिपिक (गोप गुट) निलंबित, कार्यालय कार्य बाधित करने, अन्य कर्मियों को जबरन हड़ताल पर जाने हेतु उकसाने का आरोप

पटना।

जिलाधिकारी, पटना ने समाहरणालय संवर्ग के दो लिपिकों को कार्यालय कार्य बाधित करने, अन्य कर्मियों को जबरन हड़ताल पर जाने हेतु उकसाने, निर्वाचन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों में व्यवधान उत्पन्न

करने तथा वरीय पदाधिकारी के निदेश की अवहेलना करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

निलंबित कर्मियों का विवरण इस प्रकार है—

1. श्री कुमार इन्द्रजीत — राज्याध्यक्ष, बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ (गोप गुट, पटना), सहायक प्रशासी पदाधिकारी, जिला नजारत शाखा, पटना (प्रतिनियुक्त – जिला आपूर्ति कार्यालय, पटना)।

2. श्री ऋषिराज कश्यप — राज्य कोषाध्यक्ष, बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ (गोप गुट, पटना), प्रधान लिपिक, जिला पंचायत राज कार्यालय, पटना।

हड़ताल की पृष्ठभूमि

बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ (गोप गुट, पटना) की ओर से 10 सूत्री मांगों को लेकर राज्य इकाई के आह्वान पर 09 अगस्त 2025 से कुछ लिपिक और 20 अगस्त 2025 से कई लिपिक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे।

इस दौरान जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा था कि हड़ताल की अवधि का वेतन No Work, No Pay के सिद्धांत पर देय नहीं होगा। साथ ही, सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था।

चेतावनी के बाद भी नहीं लौटे कर्तव्य पर

जिला स्तर पर विभिन्न कार्यालयों के प्रधानों ने हड़ताली कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर कर्तव्य पर लौटने का निर्देश दिया था और चेतावनी दी थी कि अनुपालन न होने पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। बावजूद इसके, कई कर्मी अब तक कार्य पर वापस नहीं लौटे।

28 अगस्त 2025 को राज्य स्तर पर वार्ता भी हुई थी, जिसमें सरकार ने मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद कुछ कर्मियों ने कार्य पर योगदान नहीं दिया।

गंभीर आरोप और निलंबन

जिलाधिकारी ने बताया कि हड़ताल के दौरान निलंबित दोनों लिपिकों ने न केवल स्वयं कार्य बंद किया, बल्कि अन्य कर्मियों को भी जबरन हड़ताल में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। इससे समाहरणालय का कार्यालय कार्य ठप्प हो गया और विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे निर्वाचन संबंधी अति महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए।

इस कृत्य को सरकारी कर्मचारी की अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं वरीय पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना माना गया है।

कानूनी प्रावधान और निलंबन आदेश

उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकारी सेवक नियमावली-2005 (संशोधित 2007) के नियम-9(i), (ii), (iii) के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए दोनों लिपिकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय अनुमंडल कार्यालय, दानापुर निर्धारित किया गया है तथा उन्हें केवल जीवन यापन भत्ता ही देय होगा।

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